प्रभारी मंत्री के दौरे पर भारी पड़ी वायरल व्हाट्सएप चैट 

सीधी । जिले के प्रभारी मंत्री के दौरे पर वायरल व्हाट्सएप चैट भारी पड़ गई। मामला जनपद पंचायत मझौली में पदस्थ उपयंत्री द्वारा विभागीय व्हाट्सएप गु्रप में जीआरएस एवं सचिवों से डाटा फीडिंग हेतु 3-3 हजार की कंसल्टेंट फीस जमा करने के मैसेज से सियासत गरमा गई।

जिले के मझौली में प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल के दौरे से पहले व्हाट्सएप चैट के सोशल मीडिया में वायरल होते ही तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। चैट में मझौली जनपद पंचायत के सब इंजीनियर एके दीपांकर और एसडीओ सरिता ङ्क्षसह पर ग्राम रोजगार सहायकों और सचिवों से तीन-तीन हजार रुपए चमराडोल एवं परसिली को छोडक़र आज ही जनपद में जमा करने का मैसेज था। प्रभारी मंत्री के प्रस्तावित दौरे से पहले उक्त व्हाट्सएप चैट के वायरल होते ही विवाद खड़ा हो गया। दावा यह किया जाने लगा कि यह राशि मंत्री के व्यवस्थाओं के लिए मझौली क्षेत्र में मांगी गई थी। बताया गया है कि सेक्टर करमाई के नाम से बनाए गए व्हाट्सएप गु्रप में यह मैसेज उपयंत्री अनित कुमार दीपांकर द्वारा शेयर किया गया था। कुछ संबंधितों द्वारा जब जानकारी चाही गई तो बताया जा रहा है कि एसडीओ द्वारा भी राशि जमा करने की पुष्टि की गई। जानकारों का कहना है कि मझौली जनपद पंचायत में 53 ग्राम पंचायतें हैं। जिनमें 2 ग्राम पंचायतों चमराडोल एवं परसिली को छोडक़र 51 ग्राम पंचायतों में सचिव एवं रोजगार सहायक पदस्थ है। प्रति पंचायत 3 हजार के मान से 51 ग्राम पंचायतों से करीब डेढ़ लाख की वसूली होनी थी। अब चैट वायरल होने से जिम्मेदार अधिकारी भी पूरी तरह से बचाव की मुद्रा में नजर आ रहे हैं। उनके द्वारा जो भी दलीलें दी जा रही हैं वह भी लोगों की समझ से परे है।

वायरल व्हाट्सएप चैट को लेकर कांग्रेस ने खड़े किए सवाल

मझौली क्षेत्र में प्रभारी मंत्री के दौरे से पूर्व जिस तरह से सोशल मीडिया में आरईएस के उपयंत्री का तीन-तीन हजार रुपए जीआरएस एवं सचिवों से जमा करने का व्हाट्सएप चैट वायरल हुआ है उसको लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। जिला कांग्रेस कमेटी सीधी के महामंत्री ज्ञानेन्द्र अग्रिहोत्री का कहना है कि जो व्हाट्सएप चैट वायरल हुई है मझौली जनपद पंचायत के करमाई सेक्टर के इंजीनियर और पंचायत सचिव की बताई जा रही है। जिले के प्रभारी मंत्री का रात्रि विश्राम परसिली रेस्टहाउस में था ऐसे में शंका होना जायज है क्योंकि भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार है। उक्त विषय का स्पष्ट होना आवश्यक है।

इनका कहना है

मेरे ऊपर एलिगेशन लगाया गया है कि जीआरएस एवं सचिवों से 3-3 हजार रुपए मांगा है। यह डायरेक्ट मांग नहीं थी। वह केवल एक मैसेज था। उस मैसेज में जीआईएस के प्लानर कंप्लीट करने के लिए बोला गया था। अपने यहां जीआईएस एक्सपर्ट नहीं हैं। जो प्रभारी मंत्री के लिए बोला गया उसमें हमारा कोई योगदान नहीं है।

श्रीमती सरिता सिंह, एसडीओ आरईएस उप संभाग मझौली

वायरल चैट मैसेज के संबंध में उनका कहना है कि जो मैसेज हमारे कर्मचारी द्वारा किया गया था वह वास्तव में जीआईएस प्लान बनता है उस प्लान को प्लानर्स साफ्टवेयर में अपलोड करने के लिए एक कंसल्टेंसी से सलाह लेने के लिए प्रेषित किया गया था। उस मैसेज का प्रभारी मंत्री या अन्य से कोई संबंध नहीं है।

धनंजय मिश्रा, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सीधी

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