उज्जैन: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की महाकाल की नगरी उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने की घोषणा कर सियासी हलचल जरूर बढ़ा दी है, बावजूद उज्जैन कांग्रेस के भीतर तस्वीर कुछ और ही नजर आ रही है. यात्रा का ऐलान हो गया, अब तक यह तय नहीं हो सका कि आखिर इस पूरी यात्रा की जिम्मेदारी कौन संभालेगा?
महाकाल मंदिर में दर्शन के बाद निकलने वाली इस यात्रा का संयोजक कौन होगा, अगुवाई कौन करेगा, व्यवस्थाओं की कमान किसके हाथ में होगी, इसे लेकर कांग्रेस के भीतर खामोशी पसरी हुई है.
रूपरेखा नहीं बना रहे
शहर कांग्रेस के नेताओं से लेकर जिला संगठन तक किसी के पास यात्रा की स्पष्ट रूपरेखा नजर नहीं आ रही. यात्रा किन-किन मार्गों से गुजरेगी, कहां-कहां मंच लगेंगे, सभाएं होंगी या नहीं, बड़े नेताओं के संबोधन होंगे या नहीं, कार्यकर्ताओं को किस तरह जोड़ा जाएगा, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. सबसे बड़ी बात यह है कि कोई भी नेता खुलकर यह कहने को तैयार नहीं दिख रहा कि वह इस यात्रा की जिम्मेदारी संभालेगा. यही वजह है कि कांग्रेस के भीतर दबी जुबान में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
दिग्गी से बचना चाहते हैं कुछ नेता
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मौजूदा हालात में कई नेता दिग्विजय सिंह के साथ खुलकर खड़े होने से बच रहे हैं. कुछ नेताओं का मानना है कि प्रदेश कांग्रेस में पहले से कई शक्ति केंद्र सक्रिय हैं और भविष्य की राजनीति को देखते हुए कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहता, जिससे उसके राजनीतिक समीकरण बिगड़ जाएं.
