
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण हस्तक्षेप से इंकार कर दिया गया था। इसीलिए जनहित याचिका वापस लेने का निर्णय लिया गया। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र भेजा गया है। जिसके जरिए जबलपुर सहित समूचे राज्य में अवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंता जताई गई है। पत्र की प्रतिलिपि जबलपुर के मेयर, नगर निगम आयुक्त व कलेक्टर को भी भेजी गई है।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर के प्रांताध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे, समाजसेवी रजत भार्गव व अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जबलपुर जिले में डाग बाइट के केसेस की संख्या में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है। इससे नागरिकों का जीवन खतरे में पड़ा है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत स्ट्रीट डाग पर नियंत्रण करने की कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो रही है, न ही इस सिलसिले में निश्चित एक्शन प्लान बनाया गया है। अत: सुप्रीम कोर्ट दिशा-निर्देश जारी करे।
इंदौर पहले व जबलपुर दूसरे स्थान पर-
नेशनल रैबिज कन्ट्रोल प्रोग्राम की वर्ष 2025 की रिपोर्ट में बताया है कि इंदौर में जनवरी से जून के बीच 30,304 डाग बाइट के केसेस हुए। जबलपुर में इन छह महीनों में 13,619 केसेस रिकार्ड हुए है। स्पष्ट है कि डाग बाइट के संबंध में जबलपुर प्रदेश में दूसरे नम्बर पर है। इससे चिंतित होकर जबलपुर के मेयर, नगर निगम आयुक्त तथा कलेक्टर से चर्चा कर उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने हेतु बारम्बार निवेदन किया गया। किन्तु कोई भी कार्यवाही नहीं की गई। स्थिति यह है कि नोडल अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई, स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड आदि सार्वजनिक स्थानों में आवारा कुत्ते घूम रहे है। कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण कार्य में सुस्ती है। यहा तक की पिछले कई वर्षों में कुत्तों के संख्या की गिनती तक नहीं हुई है।
