नयी दिल्ली, 07 जुलाई (वार्ता) दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने कहा है कि राजधानी में ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों की जीवित रहने की दर बेहद कम है, इसलिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटने के बाद केवल नए पौधे लगाना पर्यावरण संरक्षण का समाधान नहीं हो सकता।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली वन विभाग के आधिकारिक ऑडिट के अनुसार ट्रांसप्लांट किये गये पेड़ों में केवल 33 से 42.5 प्रतिशत ही जीवित रहते हैं, जबकि 80 प्रतिशत जीवित रहने का लक्ष्य शायद ही पूरा हो पाता है। उन्होंने कहा कि सरोजिनी नगर जीपीआरए पुनर्विकास परियोजना के लिए राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (इंडिया) लिमिटेड को 1,091 पेड़ों के ट्रांसप्लांट और 42 पेड़ काटने की अनुमति दी गयी है। इसके साथ ही प्रत्येक कटे पेड़ के बदले 10 पौधे लगाने और ट्रांसप्लांट किये गये पेड़ों के न बचने पर स्थानीय प्रजाति के पेड़ लगाने की शर्त भी रखी गयी है।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा शुरू किये गये 70 लाख पौधे लगाने के अभियान का स्वागत करते हुए कहा कि यह तभी सार्थक होगा जब मौजूदा बड़े पेड़ों के संरक्षण, निगरानी और जवाबदेही को समान प्राथमिकता दी जाये। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में दिल्ली की हरियाली लगातार घटी है और सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1.5 लाख से अधिक पेड़ काटे या ट्रांसप्लांट किये गये हैं।
श्री यादव ने कहा कि दिल्ली उच्च नयायालय ने भी पेड़ों की कटाई, ट्रांसप्लांटेशन और पौधारोपण का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने पर जोर दिया है। उन्होंने सरकार से विकास परियोजनाओं के नाम पर पेड़ों की कटाई और संरक्षण की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा केवल पौधारोपण के बजाय पेड़ों की सुरक्षा पर भी समान ध्यान देने की मांग की।
