
संयुक्त राष्ट्र, 07 जुलाई (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सदस्य देशों से नरसंहार, युद्ध अपराधों और अन्य सामूहिक अत्याचारों की रोकथाम के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाने का आह्वान करते हुए चेतावनी दी है कि बढ़ते संघर्ष, दंडहीनता और नयी प्रौद्योगिकियां नागरिक आबादी के लिए खतरा बढ़ा रही हैं। श्री गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘रेस्पॉन्सिबिलिटी टू प्रोटेक्ट’ (आर2पी) सिद्धांत पर अपनी 18वीं रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि 2005 में विश्व नेताओं द्वारा किया गया यह संकल्प आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि वैश्विक संघर्ष अधिक जटिल और परस्पर जुड़े हुए हैं।
रिपोर्ट में राज्यों की इस जिम्मेदारी की पुनः पुष्टि की गयी है कि वे प्रभावित समुदायों, नागरिक समाज, उप-क्षेत्रीय एवं क्षेत्रीय संगठनों तथा संयुक्त राष्ट्र के साथ रचनात्मक और सतत सहयोग सुनिश्चित करें। श्री गुटेरेस की ओर से उनके चीफ ऑफ कैबिनेट कोर्टने रैट्रे ने संबोधन पढ़ते हुए कहा कि 2025 में दुनिया ने 120 से अधिक संघर्षों का सामना किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का व्यापक उल्लंघन हो रहा है और प्रारंभिक चेतावनी संकेतों पर प्रतिक्रिया अक्सर “बहुत कम और बहुत देर से” होती है।
‘रेस्पॉन्सिबिलिटी टू प्रोटेक्ट’ सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी अपनी जनता को नरसंहार, युद्ध अपराध, जातीय सफाये और मानवता के विरुद्ध अपराधों से बचाना है। यदि कोई राज्य इसमें विफल रहता है तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक कार्रवाई की भी व्यवस्था है।
श्री गुटेरेस ने कहा कि सरकारों को रोकथाम संबंधी कार्यक्रमों में निवेश करना चाहिए, नागरिक समाज के साथ सहयोग बढ़ाना चाहिए तथा हिंसा बढ़ने से पहले जोखिमों की पहचान और समाधान के लिए राष्ट्रीय तंत्र विकसित करना चाहिए। उन्होंने सदस्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से शांति प्रयासों, मानवीय अभियानों, मध्यस्थता और संघर्ष रोकथाम की पहलों में अत्याचार-निरोधक उपायों को शामिल करने का भी आग्रह किया।
महासचिव ने अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों, विशेषकर अधिक स्वायत्त हथियारों और ड्रोन, के बढ़ते खतरे के साथ-साथ ऑनलाइन घृणा संबंधी बयानबाजी, दुष्प्रचार और भ्रामक सूचनाओं के तेजी से प्रसार पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नयी प्रौद्योगिकियां और अधिक स्वायत्त हथियार प्रणालियां बड़ी आबादी को भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय और बहुपक्षीय स्तर पर अत्याचारों की रोकथाम को शांति स्थापना, संघर्ष रोकथाम, मानवीय प्रयासों, मध्यस्थता, निवारक कूटनीति, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, मानवाधिकार और जवाबदेही से जुड़े सभी ढांचों का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
श्री गुटेरेस ने सदस्य देशों से सक्रिय और सतर्क रहने का आह्वान करते हुए कहा कि अत्याचारों की रोकथाम के लिए मजबूत संस्थानों, स्वतंत्र न्याय प्रणाली, जवाबदेही तंत्र तथा स्वतंत्र मीडिया और नागरिक समाज संगठनों को समर्थन देना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि हिंसा समाप्त होने के बाद भी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। स्थायी शांति के लिए सत्य, न्याय, क्षतिपूर्ति, संस्थागत सुधार तथा पीड़ितों, विशेषकर महिलाओं, की सार्थक भागीदारी जरूरी है। महासचिव ने सदस्य देशों से नरसंहार अपराध की रोकथाम और दंड संबंधी अंतरराष्ट्रीय संधियों सहित अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचों का समर्थन करने का आह्वान किया। श्री गुटेरेस ने कहा, “वर्ष 2005 में विश्व नेताओं ने जो वादा किया था, दो दशक बाद भी उसे पूरा करने का समय है,” और अत्याचारों की रोकथाम को वैश्विक स्तर पर स्थायी प्राथमिकता बनाने का आग्रह किया।
