मजदूर संघ हथौड़ा को मिली मान्यता, 50 सालों के संघर्ष पर लगा विराम

जबलपुर: 50 साल के संघर्ष के बाद अंतत: जीसीएफ मजदूर संघ हथोड़ा को मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस से मान्यता मिल चुकी है। मतलब साफ है कि जीसीएफ मजदूर संघ हथौड़ा का रजिस्ट्रेशन मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में हो चुका है। अब संगठन सीधे मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस से संपर्क कर सकेगा। जानकारी के अनुसार पहले मजदूर संघ हथौड़ा पहले एआईडीईएफ ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलायड फेडरेशन से संपर्क करता था और फिर उसके बाद उनकी बातें मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस तक पहुंचा पाती थीं। गौरतलब है कि नवंबर 1972 में मजदूर संघ हथौड़ा यूनियन की जीसीएफ में स्थापना हुई थी।

भारत सरकार में रजिस्टे्शन होने के बाद जीसीएफ मजदूर संघ हथौड़ा से जुड़े हर एक कर्मचारी में खुशी की लहर है। इस संंबंध में जीसीएफ मजदूर संघ हथौड़ा के उत्तम विश्वास ने नवभारत को जानकारी देते हुए बताया कि विगत वर्ष 2024 में यूनियनों के बीच सदस्यता सत्यापन चुनाव हुआ था जिसमें सबसे ज्यादा 49 परसेंट वोट उनके जीसीएफ मजदूर संघ हथौड़ा को मिले थे। जबकि नियमानुसार जिस यूनियन के 15 सदस्यों से कम संख्या निर्माणियों में होती है उनकी मान्यता वहीं समाप्त हो जाती है।
एआईईडीएफ राष्ट्रीय अध्यक्ष ने की मदद
इस संबंध में जीसीएफ मजदूर संघ हथोड़ा के विनय गुप्ता, रोहित यादव, अमित चंदेल ने बताया कि एआईडीइएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसएन पाठक ने मान्यता दिलाने में बहुत मदद की है। उन्होंने ही डिफेंस से जुड़ी समस्याओं को सरकार के समक्ष रखा जिसमें जीसीएफ मजदूर संघ हथौड़ा के कर्मचारियों के परिजनों की अनुकंपा नियुक्ति की समस्या, रक्षा संस्थानों की उन्नति और कर्मचारियों के अन्य हितों के विषय शामिल रहे। मान्यता मिलने के बाद अब जीसीएफ मजदूर संघ हथौड़ा एक शक्तिशाली संगठन के रूप में कर्मचारी हित के मुद्दे और भी मजबूती के साथ रखने के लिए सशक्त हो गया है।

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