आधी रात को घर में घुसी पुलिस बिना वारंट उठाया

गुना: कैंट थाना क्षेत्र में खाकी की प्रताड़ना और कथित तानाशाही का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक फल का ठेला लगाकर जीवन यापन करने वाले सीधे-साधे और मेहनतकश परिवार ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।पुलिस के कथित आतंक से भयभीत पूरा मांझी परिवार महिलाओं और बच्चों सहित पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचा और शिकायती आवेदन देकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्यवाही की मांग की।

पीड़ितों का कहना है कि पुलिस ने उनके साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार किया जैसे वे किसी बड़े और खूंखार अपराधी का परिवार हों। पीड़ित रामू मांझी ने अपनी शिकायत में बताया कि गत 3 जुलाई 2026 की रात करीब 12:30 बजे अचानक 4 से 5 पुलिसकर्मी उनके घर धमक पड़े। पुलिसकर्मियों ने बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए घर के दरवाजे पर जोर-जोर से लात मारी और जबरन भीतर घुस गए। उस समय घर में परिवार की बहुएं सो रही थीं, जो अचानक हुई इस पुलिसिया दबिश से बुरी तरह सहम गईं और डर के मारे रोने-बिलखने लगीं। महिलाओं के लगातार रोने और मिन्नतें करने के बाद भी पुलिसकर्मियों का दिल नहीं पसीजा और वे रामू मांझी के दोनों बेटों को जबरन घसीटते हुए अपनी गाड़ी में बैठाकर ले गए।

बिना वारंट और एफआईआर के ‘वारंट’ का झूठा बहाना
शिकायत के मुताबिक, जब पीड़ित परिवार ने आधी रात को इस तरह उठाए जाने का कारण पूछा, तो पुलिसकर्मियों ने कहा कि रामू मांझी के बड़े भाई गुरुदयाल मांझी का स्थाई वारंट है। जबकि असलियत यह है कि गुरुदयाल मांझी के नाम पर न तो कोई वारंट जारी हुआ था और न ही उनके खिलाफ किसी थाने में कोई प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज है। स्वयं गुरुदयाल मांझी भी महिलाओं के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे और उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास आज तक थाने से कोई समंस या नोटिस नहीं आया और न ही उनकी जानकारी में उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज है।

सीसीटीवी विहीन कमरे में ले जाकर की बेरहमी से मारपीट
पीड़ितों का आरोप है कि पुलिसकर्मी रामू मांझी और उनके बेटों को थाने ले गए। वहां उन्हें जानबूझकर एक ऐसे गुप्त कमरे में बंद किया गया जहां सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था, ताकि पुलिस की बर्बरता का कोई वीडियो साक्ष्य रिकॉर्ड न हो सके। उस कमरे में उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। मारपीट के दौरान पुलिसकर्मी आरोप लगा रहे थे कि रामू और उनके परिवार ने किसी ‘लक्ष्मीनारायण’ नामक पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की है। इस आरोप पर रामू मांझी ने वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि उक्त पुलिसकर्मी लक्ष्मीनारायण अक्सर उनके फल के ठेले पर आता है और बदतमीजी करता है। वह रसूख दिखाकर लगातार मुफ्त (फ्री) में फल और सामान देने का दबाव बनाता है, जिसका विरोध करने पर वह रंजिश रखने लगा था और इसी कारण उसने पुलिसिया प्रभाव का दुरुपयोग कर उनके परिवार को प्रताड़ित करवाया।

‘निर्दोष हैं तो मिले न्याय, दोषी पुलिसकर्मियों पर हो सख्त कार्यवाही’
एसपी कार्यालय पहुंचे पीड़ित मांझी परिवार ने बेहद भावुक शब्दों में अपनी बात रखते हुए कहा कि वे सभी मेहनत-मजदूरी और फल का ठेला लगाकर अपना पेट पालते हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि वे किसी भी स्तर पर गलत पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई की जाए, लेकिन यदि वे पूरी तरह निर्दोष हैं—जैसा कि वे हैं—तो पद का दुरुपयोग कर आधी रात को तांडव मचाने वाले और बिना कैमरे वाले कमरे में मारपीट करने वाले दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं।

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