दम तोड़ती अजनार नदी को संजीवनी का इंतज़ार, गंदगी और अतिक्रमण ने छीनी पहचान

ब्यावरा: शासन द्वारा जल स्रोतों के पुर्न जीवन, संरक्षण एवं जल स्रोतों के प्रति जागरुकता हेतु जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है जिसमें प्राचीन जल स्रोतों की साफ-सफाई, रख-रखाव एवं संरक्षण किया जाना है. किंतु स्थानीय अजनार नदी मानों इस अभियान को मुंह चिढ़ा रही है, लम्बे समय से दुर्दशा का शिकार अजनार नदी आज अपने अस्तित्व से जूझ रही है.
जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सुरक्षित जल-समृद्ध कल की परिकल्पना के तहत यह अभियान 19 मार्च से 27 मार्च तक चलेगा. मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के तत्वावधान में जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुर्न जीवन एवं जन जागरुकता के उद्देश्य से आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जन सहभागिता से जल स्रोतों की साफ-सफाई एवं जागरुकता हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा.
संरक्षण के नाम पर मात्र औपचारिकता
स्थानीय अजनार नदी की दुर्दशा से हर कोई व्यथित हो उठता है. एक समय स्वच्छ पानी से भरपूर अजनार नदी आज किसी छोटे-मोटे नाले की तरह नजर आती है. एक समय काफी बड़े क्षेत्रफल में फैली नदी आज सिमटकर उथली हो गई है. इसका अस्तित्व ही खतरे में आ गया है. समय-समय पर अजनार नदी के संरक्षण और स्वच्छता को लेकर कार्य योजनाएं बनी किंतु यह मात्र कागजों तक ही सिमटकर रह गये. सही मायने में जल गंगा संवर्धन अभियान की जरुरत आज अजनार नदी को है ताकि नदी की दशा सुधर सके.
शुद्धता के नाम पर गंदा और मटमैला पानी
अजनार नदी के पानी की शुद्धता की बात की जाये तो आज नदी में पानी बचा ही नहीं है और जो पानी है वह काफी गंदा और मटमैला है. विडम्बना यह है कि नदी में आधा दर्जन नाले आकर मिलते है जिनका सीधा पानी नदी में आकर मिलता है, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नदी के पानी में कितनी शुद्धता रही होगी. आज अजनार नदी को सबसे अधिक संरक्षण और देखरेख तथा साफ-सफाई की आवश्यकता है.

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