सीहोर। जिला प्रशासन के स्पष्ट प्रतिबंध और सख्त चेतावनियों के बावजूद जिले में किसानों द्वारा नरवाई जलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. हालात यह हैं कि खुलेआम खेतों में नरवाई को आग के हवाले किया जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है बल्कि आमजन की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है. रविवार को श्यामपुर रोड पर ऐसा ही खतरनाक मंजर देखने को मिला, जब नरवाई जलाने से उठे घने धुएं ने पूरे मार्ग को अपनी चपेट में ले लिया.
दोपहर के समय सड़क पर फैले धुएं के कारण दृश्यता लगभग शून्य हो गई थी. वाहन चालकों को आगे का रास्ता साफ दिखाई नहीं दे रहा था, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ गई. खासतौर पर दुपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग अपनी जान जोखिम में डालकर धीरे-धीरे आगे बढ़ते नजर आए, जबकि कुछ ने समझदारी दिखाते हुए सड़क किनारे रुककर धुआं छंटने का इंतजार किया.
गौरतलब है कि जिला प्रशासन द्वारा हर वर्ष की तरह इस बार भी नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है. इसके बावजूद आदेशों की अनदेखी करते हुए किसान इस प्रथा को जारी रखे हुए हैं. प्रशासन ने आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर नगण्य नजर आ रहा है.
नरवाई जलाने से सिर्फ सड़क हादसों का खतरा ही नहीं बढ़ता, बल्कि इससे आगजनी की घटनाओं की संभावना भी बनी रहती है. कई बार आग आसपास के खेतों, पेड़ों या बस्तियों तक फैल सकती है. इसके अलावा धुएं के कारण वातावरण में प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ता है, जिससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगती हैं.
इस मामले में स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को केवल आदेश जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सख्ती से उसका पालन भी सुनिश्चित करना चाहिए. नियमित निगरानी, मौके पर कार्रवाई और दोषियों पर जुर्माना या अन्य दंडात्मक कदम उठाए जाएं, तभी इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है. यदि समय रहते इस ओर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है.
