
साक्षी केसरवानी भोपाल। राजधानी के हमीदिया और जेपी जिला अस्पताल में बुनियादी चिकित्सा नियम ताक-ताक हो चुके हैं. अस्पतालों में आए दिन मरीजों को दिया जाने वाले स्ट्रेचरों पर न तो रबर शीट है और न ही साफ चादर. इसका जीता जागता प्रमाण गुरुवार को जेपी जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के पास देखने को मिला. जहां गेट के बाहर रखे स्ट्रेचर पर पिछले मरीज का खून लगा हुआ था और उसे बिना साफ किए ही अगले मरीज के लिये ही छोड़ दिया गया. इतना ही नहीं पास में रखे दो अन्य स्ट्रेचर पर भी चादर का नामोनिशान नहीं था। बता दें यही हाल हमीदिया अस्पताल में भी मरीजों को मिलने वाले स्ट्रेचर का है, जहां अधिक्तर स्ट्रेचर पर चादर और गद्दे का देखने को नहीं मिलते.
-क्या कहते हैं नियम
डब्ल्यूएचओ और चिकित्सा नियमों के मुताबिक हर एक मरीज को स्ट्रेचर से उतारने के बाद पुरानी चादर या डिस्पोजेबल शीट को हटाकर स्ट्रेचर को खास केमिकल से सैनिटाइज करना अनिवार्य है. जो कि मरीज और स्ट्रेचर के बीच सुरक्षा दीवार का काम करती है। वहीं हर नए मरीज के लिए स्ट्रेचर को सैनिटाइज करना और साफ चादर बिछाना अनिवार्य है।
-प्रबंधन ही लापरवाह तो क्या नियम
स्ट्रेचर पर शीट और साफ चादर की अनिवार्यता को लेकर जीएमसी डीन डॉ. कविता एन सिंह ने कहा कि स्ट्रेचर पर शीट और चादर रखना चाहिये, इस विषय पर नियमों से संबंधित जानकारी अस्पताल अधीक्षक दे सकतें है. लेकिन मामले को लेकर अधीक्षक सुमीत टंडन ने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है, किसी मरीज को संक्रमण का खतरा नहीं है.
-दोगुना है बिना चादर और सैनेटाइजेशन के संक्रमण का खतरा
डॉक्टरों के अनुसार बिना सैनेटाइज और साफ चादर के मरीज का शरीर सीधे स्ट्रेचर के संपर्क में आता है, तो इंफेक्सन से त्वचा पर सड़ने वाले घाव हो सकते हैं. मरीजों की उल्टी या दस्त के बारीक अंश गद्दे या स्ट्रेचर पर रह जाने से बिना चादर के ई-कोलाई बैक्टीरिया और नोरोवायरस फैल सकता है. जिससे अगले मरीज को पेट में मरोड़, तेज उल्टी और जानलेवा दस्त की शिकायत हो सकती है। वहीं एक्सीडेंट या चोट लगे मरीजों का खून अक्सर स्ट्रेचर पर गिर जाता है। जो दूसरे मरीज के संपर्क में आने से उसे हेपेटाइटिस बी, सी जैसी लीवर को सड़ाने वाली बीमारियां हो सकती हैं।
इस मामले में सीएमएचओ मनीष शर्मा से फोन के जरिये संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी.
