
नई दिल्ली। दुनिया की सबसे लोकप्रिय डिजिटल करेंसी बिटकॉइन एक बार फिर तेज गिरावट के दौर से गुजर रही है। पिछले सप्ताहांत शुरू हुई बिकवाली का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा और कीमत 80 हजार डॉलर के नीचे फिसल चुकी है। ताजा गिरावट के बाद साल की शुरुआत से अब तक बिटकॉइन अपने मूल्य का लगभग एक-तिहाई हिस्सा गंवा चुका है, जिससे छोटे और बड़े निवेशकों दोनों की चिंता बढ़ गई है।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले तक बिटकॉइन में जबरदस्त उछाल देखा गया था। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद बाजार को उम्मीद थी कि वॉशिंगटन क्रिप्टो के लिए अनुकूल नियम लाएगा। इसी उम्मीद के दम पर दिसंबर 2024 में बिटकॉइन पहली बार एक लाख डॉलर के स्तर को पार कर गया था।
हालांकि इसके बाद हालात तेजी से बदले। अक्टूबर में 1.27 लाख डॉलर से अधिक के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर को छूने के बाद डिजिटल एसेट लगातार दबाव में है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, सख्त नियामकीय बहस और वित्तीय संस्थानों की सतर्कता ने बाजार का भरोसा कमजोर किया है।
स्थिति को और जटिल तब बना दिया जब डिजिटल एसेट ट्रेड को नियमित करने वाला ट्रंप समर्थित विधेयक अमेरिकी सीनेट में अटक गया। बैंकिंग क्षेत्र और क्रिप्टो कंपनियों के बीच मतभेद के कारण इस बिल पर सहमति नहीं बन पाई, जिसका असर सीधे बाजार के मनोबल पर पड़ा।
उधर ट्रंप परिवार से जुड़ी क्रिप्टो कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल भी जांच के दायरे में आ गई है। अमेरिकी कांग्रेस में उस समय सवाल उठे जब एक अंतरराष्ट्रीय निवेश सौदे की खबर सामने आई, जिसमें अबू धाबी के एक अधिकारी के प्रतिनिधियों द्वारा बड़ी हिस्सेदारी के लिए भारी निवेश की बात कही गई। इन घटनाक्रमों ने क्रिप्टो बाजार में अनिश्चितता और बढ़ा दी है, जिसके चलते बिटकॉइन की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है।
