सतना:कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों, तो व्यवस्था की लाचारी भी घुटने टेक देती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है सतना जिले के नकटी देवीपुर गांव के युवाओं और ग्रामीणों ने। नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के चौखट पर 13 सालों तक सिर पटकने के बाद भी जब सड़क नसीब नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने किसी सरकारी इमदाद का इंतजार किए बिना खुद ही कमान संभाल ली। ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर और जीतोड़ श्रमदान करके करीब 1.5 किलोमीटर लंबे कच्चे रास्ते को मोटरेबल (सड़क) बना दिया। दिलचस्प बात यह है कि यह गांव सूबे की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
1.25 लाख का चंदा और ट्रैक्टर से बदली तस्वीर
नेताओं के झूठे वादों से तंग आकर ग्रामीणों ने आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया। गांव के लोगों ने आपसी सहयोग से करीब 1.25 लाख रुपए का चंदा इकट्ठा किया। इस मुहिम में पंचायत से कोई आर्थिक मदद नहीं ली गई। जुटाए गए पैसों से क्रेशर का रॉ मटेरियल और गिट्टी मंगवाई गई। इसके बाद गांव के युवाओं ने ट्रैक्टर के रोटावेटर की मदद से करीब डेढ़ किलोमीटर की दलदल भरी कच्ची सड़क को समतल कर चलने लायक बना दिया। रविवार को यह काम पूरी तरह संपन्न हो गया, जिसके बाद ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी साफ देखी जा सकती थी।
बारिश में टापू बन जाता था गांव
ग्रामीण सौरभ सिंह ने बताया कि करीब 1500 की आबादी वाला यह गांव हर साल बारिश के मौसम में मुख्यधारा से कट जाता था। सड़क पूरी तरह दलदल में तब्दील हो जाती थी, जिससे बच्चों का स्कूल जाना दूभर हो जाता था। सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में होती थी। लेकिन इस बार ग्रामीणों की एकजुटता के कारण बरसात में भी गांव का संपर्क नहीं टूटेगा।
