कीटनाशकों के ई-कॉमर्स के लिए बनें कड़े कानून: संगठन

नयी दिल्ली, 21 जनवरी (वार्ता) कीटनाशक बनाने वाली 17 बड़ी कंपनियों के संगठन ‘क्रॉपलाइफ इंडिया’ ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इनकी बिक्री के लिए कड़े कानून बनाने की मांग की है ताकि घटिया या नकली उत्पादों से किसानों को संभावित नुकसान की स्थिति में जवाबदेही तय की जा सके।
क्रॉपलाइफ इंडिया के अध्यक्ष और क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन के कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अंकुर अग्रवाल ने बुधवार को यहां ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर फसलों की सुरक्षा से संबंधित उत्पादों पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन से इतर संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि मौजूदा समय में कीटनाशकों का विनियमन इनसेक्टिसाइड्स एक्ट, 1968 के तहत होता है। सरकार ने साल 2022 में इसमें संशोधन कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आम उत्पादों की तरह कीटनाशकों की बिक्री के लिए भी अनुमति प्रदान की थी। अब सरकार पेस्टिसाइड मैनेजमेंट विधेयक लाने की तैयारी कर रही है जिसका प्रारूप तैयार हो चुका है। सरकार ने संगठन से 04 फरवरी तक अपने सुझाव सौंपने के लिए कहा है।
विधेयक के प्रारूप का स्वागत करते हुए श्री अग्रवाल ने कहा कि जिस प्रकार विक्रेता को लाइसेंस की जरूरत होती है उसी तरह ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के लिए भी लाइसेंस या मान्यता अनिवार्य की जानी चाहिये। वर्तमान समय में यह सुनिश्चित करने का कोई तरीका नहीं है कि ऑनलाइन बिक रहा पेस्टिसाइड असली है या नकली। उन्होंने कहा कि यदि कोई कंपनी बिना लाइसेंस के कीटनाशक बेच रही है तो उस पर भी नकली उत्पाद की तरह ही कार्रवाई होनी चाहिये। कार्यक्रम को केंद्रीय कृषि आयुक्त पी.के. सिंह और केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति के सचिव सुभाष चंद ने भी संबोधित किया।

श्री अग्रवाल के अनुसार, इस समय देश का घरेलू कीटनाशक बाजार लगभग 26 हजार करोड़ रुपये का है और निर्यात 40 हजार करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि घरेलू बिक्री में एक प्रतिशत से कुछ कम हिस्सेदारी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की है। इसमें कई बार नकली और घटिया कीटनाशकों की खबरें भी आती हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय करने के लिए कोई नियम नहीं होने के कारण उसके माध्यम से नकली उत्पादों की बिक्री और आसान हो जाती है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कीटनाशकों पर भारी छूट के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं है कि उत्पाद घटिया हों, कंपनियों की बाजार पर कब्जे की कोशिश भी एक कारण हो सकता है। उन्होंने कहा कि वे किसी अधिकतम या न्यूनतम मूल्य का समर्थन नहीं करते। विधेयक के प्रारूप में प्रावधान है कि कंपनियों को आवेदन के 12 महीने के भीतर लाइसेंस नहीं मिलने पर उसे मंजूर मान लिया जायेगा। श्री अग्रवाल ने इसे उचित बताते हुए इससे सेफ्टी के साथ समझौते की आशंकाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि आज भी देश में कीटनाशकों का इस्तेमाल काफी कम होता है। यह करीब 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर है जबकि कई विकसित देशों में यह औसत चार-पांच हजार ग्राम प्रति हेक्टेयर है। श्री अग्रवाल ने बताया कि अगले 10 साल में कीटनाशक उद्योग में औसतन 8-10 प्रतिशत सालाना की दर से वृद्धि की उम्मीद है।

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