
रीवा, राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय रीवा द्वारा मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी लेक्चर हॉल में स्नेह मिलन एवं चिकित्सक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस की सभी चिकित्सकों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह दिवस महान चिकित्सक एवं भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. बिधान चंद्र रॉय की पावन स्मृति में मनाया जाता है. उनका जीवन सेवा, समर्पण, करुणा और राष्ट्र निर्माण का अनुपम उदाहरण है.
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सकों को समाज धरती का भगवान कहकर सम्मान देता है, क्योंकि वे पीडि़त और असहाय व्यक्ति को नया जीवन देने का कार्य करते हैं. किंतु इस सम्मान की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब प्रत्येक चिकित्सक अपने सामने आने वाले प्रत्येक मरीज में भगवान का स्वरूप देखकर प्रेम, करुणा, आत्मीयता और संवेदनशीलता के साथ उसका उपचार करे. मरीज के लिए डॉक्टर केवल चिकित्सक नहीं, बल्कि आशा, विश्वास और जीवन का आधार होता है. कई बार डॉक्टर के स्नेहपूर्ण शब्द, मधुर मुस्कान और आत्मीय व्यवहार से ही रोगी की आधी बीमारी दूर हो जाती है. जीवन को सार्थक बनाने वाला पेशा चिकित्सक का होता है. चिकित्सा सेवा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सर्वोच्च सेवा है. जब चिकित्सा विज्ञान के साथ आध्यात्मिक मूल्य और मानवीय संवेदनाएँ जुड़ती हैं, तब उपचार और अधिक प्रभावशाली बन जाता है. उप मुख्यमंत्री ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं जनहितैषी बनाने की अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की.
कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्रह्माकुमारीज़ रीवा की क्षेत्रीय संचालिका बी.के. लता दीदी ने की. उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन चिकित्सकों को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा एवं तनावमुक्त जीवन प्रदान करता है. जब चिकित्सक स्वयं भीतर से शांत और शक्तिशाली होंगे, तभी वे रोगियों को भी आशा, विश्वास और आत्मबल प्रदान कर सकेंगे. ब्रह्माकुमारीज़ के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से आए बी.के. राजू भाई ने कहा कि डॉक्टर वास्तव में ‘नेक्स्ट टू गॉड’ हैं. चिकित्सा सेवा केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि ईश्वर द्वारा मानवता की सेवा का श्रेष्ठ माध्यम है. मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सक का दायित्व केवल रोग का उपचार करना नहीं, बल्कि मरीज का विश्वास बनाए रखना भी है. ऐसे सम्मान समारोह चिकित्सा सेवा के प्रति नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करते हैं. मेडिकल कॉलेज के मुख्य अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा के साथ मानवीय संवेदनाओं का समन्वय अत्यंत आवश्यक है. मरीज के प्रति आत्मीय व्यवहार ही चिकित्सक की सबसे बड़ी पहचान है.
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बी. डी. त्रिपाठी एवं डॉ. नेहा त्रिपाठी द्वारा लिखित प्रेरणादायी पुस्तक ‘दिल की आवाज़ : बच्चों में बढ़ता दृष्टि दोष’ का लोकार्पण किया गया. उपस्थित सभी अतिथियों ने पुस्तक की विषयवस्तु की सराहना करते हुए इसे बच्चों में सकारात्मक सोच एवं श्रेष्ठ संस्कार विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया. इस अवसर पर विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के वरिष्ठ चिकित्सकों, सेवानिवृत्त चिकित्सकों तथा चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएँ प्रदान करने वाले डॉक्टरों को प्रशस्तिपत्र प्रदान किए गए. कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक, सेवानिवृत्त चिकित्सक, चिकित्सा विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही.
