पटना, 29 जून (वार्ता) बिहार में ‘रिशु श्री महाघोटाले’ को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने सोमवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि हजारों करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में बड़े अधिकारियों और सत्ता के शीर्ष स्तर तक मिलीभगत रही, लेकिन सरकार छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाकर असली दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है। श्री यादव ने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, सभी दोषियों की पहचान के उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।
श्री यादव ने 20 सवालों की लंबी फेहरिस्त जारी करते हुए आरोप लगाया कि हजारों करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में बड़े अधिकारियों और असली दोषियों को बचाया जा रहा है ।
श्री यादव ने जारी बयान में आरोप लगाया कि राजग सरकार के 21 वर्षों के शासनकाल में एक मामूली ठेकेदार कई विभागों के टेंडरों को अपनी मर्जी से प्रभावित करता रहा, जबकि सरकारी निगरानी तंत्र निष्क्रिय बना रहा।उन्होंने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में सामने आए चैट से स्पष्ट होता है कि आरोपी को कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों और सत्ता के शीर्ष स्तर का संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने पूछा कि आरोपी अधिकारियों को किसके इशारे पर निर्देश देता था और चार्जशीट में कथित “बड़ी मछलियों” को क्यों छोड़ दिया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि दो आईएएस अधिकारियों के निलंबन के बावजूद उनके नाम चार्जशीट में शामिल क्यों नहीं किए गए और उनकी गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई।
श्री यादव ने कहा कि वित्त विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव तथा जल संसाधन एवं भवन निर्माण विभाग के इंजीनियरों की गिरफ्तारी के बाद सरकार को बताना चाहिए कि सरकारी खजाने को अब तक कितने करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी पहले से तय करता था कि किसे ठेका मिलेगा और उसी के अनुरूप विभागीय टेंडरों की शर्तें बदलवाई जाती थीं। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस पूरे कथित सिंडिकेट के पीछे मुख्यमंत्री कार्यालय या अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।उन्होंने दावा किया कि जांच में बिल पास कराने और टेंडर दिलाने के बदले दो से साढ़े तीन प्रतिशत तक कमीशन लेने का खुलासा हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने रिशु श्री और उससे जुड़ी सभी कंपनियों को मिले ठेकों की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने तथा कथित लाभार्थी कंपनियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की।
श्री यादव ने आरोप लगाया कि आरोपी अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेश यात्राओं, हवाई टिकट और महंगे उपहारों का खर्च उठाता था, फिर भी गृह विभाग, आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू), निगरानी और खुफिया एजेंसियां अनभिज्ञ रहीं। उन्होंने कहा कि छापेमारी में 99 संपत्तियों के दस्तावेज, करोड़ों रुपये की नकदी और जेवरात बरामद होने के बाद जनता जानना चाहती है कि एक ठेकेदार के पास इतनी बड़ी संपत्ति कैसे पहुंची।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार केवल छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई कर रही है, जबकि पूरे मामले के कथित राजनीतिक आकाओं और प्रभावशाली अधिकारियों को बचाया जा रहा है। उन्होंने संबंधित विभागों के मंत्रियों से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की। साथ ही एफआईआर दर्ज करने में देरी, अदालत में सरकार के वकीलों की अनुपस्थिति, कोसी बेसिन विकास परियोजना और कोसी बराज से जुड़े टेंडरों में कथित अनियमितताओं, विजिलेंस एवं आंतरिक ऑडिट प्रणाली की विफलता, ई-टेंडरिंग में कथित हेराफेरी तथा 4000 पन्नों की चार्जशीट में केवल सात आरोपियों को नामजद किए जाने पर भी सवाल उठाए।
