
सुरेश पाण्डेय पन्ना। कल मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री जीतू पटवारी का ढोढ़न बांध में आंदोलनरत विस्थापित परिवारों से मिलने के कार्यक्रम के तहत वे ढोढ़़न बांध गये हुये थे, चूंकि उक्त स्थान पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर ऐरिया क्षेत्र में आने के कारण प्रवेश की अनुमति लेना अनिवार्य थी जो नही ली गई थी, जिस कारण प्रदेशाध्यक्ष श्री पटवारी सहित साथ में गये कांग्रेस नेताओं के ऊपर मामला दर्ज कर लिया गया है। ज्ञात हो कि केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत ढोडन बांध क्षेत्र में विस्थापितों को उचित मुआवजा न मिलने के आरोपों के बीच पिछले चार दिनों से आदिवासी महिलाएं और ग्रामीण निर्माण कार्य रोककर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी आंदोलन में शामिल लोगों से मिलने के लिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पन्ना पहुंचे थे। जिस पर अनाधिकृत प्रवेश को लेकर जीतू पटवारी सहित साथ में गये कांग्रेस नेताओं पर पन्ना टाइगर रिजर्व ने वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 27, 35, 38 एवं 51 के तहत मामला दर्ज किया है। उपरोक्त सभी धाराएं गैर जमानती होने से श्री पटवारी सहित सभी कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें बढ़ गई है। ज्ञात हो कि इन्ही उपरोक्त धाराओं के तहत कल समाजसेवी एवं विस्थापित आदिवासियों के लिये लड़ाई का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर को जेल से निकलते ही पन्ना टाइगर रिजर्व अमले ने गिरफ्तार कर लिया था। जानकारी के अनुसार, उनके काफिले को पन्ना टाइगर रिजर्व के भूसौर नाका पर बेरिकेट्स लगाकर रोक दिया गया। इसके बावजूद भी वे बगैर अनुमति के मोटरसाइकिल के जरिए ढोडन बांध निर्माण स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारी आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीण आंदोलन में शामिल थे, जिन्होंने अपनी मांगें और समस्याएं उनके सामने रखीं। श्री पटवारी के साथ लगभग 2 से 3 दर्जन कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज किया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
क्या कहते है अधिकारी – जब उपरोक्त मामलें में फील्ड डायरेक्टर पन्ना टाइगर रिजर्व बृजेन्द्र श्रीवास्तव से चर्चा की गई तो उन्होंने उपरोक्त आपराधिक प्रकरण की पुष्टी करते हुये बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी कई कांग्रेसी नेता बिना सक्षम अनुमति के पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर ऐरिया में प्रवेश कर ढोढ़न बांध पहुंचे थे, जिस कारण अनाधिकृत प्रवेश को लेकर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा 27, 35, 38 एवं 51 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्यवाही की जा रही है।
