
जिम्मेदारों की अनदेखी की भेंट चढ़ गई 1.65 करोड़ रुपए की परियोजना
जबलपुर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में बनाए गए मॉड्यूलर टॉयलेट सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। निर्माण के बाद इन्हें लावारिस हालत में छोड़ दिया गया है। जिम्मेदारों की अनदेखी से ये टॉयलेट गंदगी, कचरे का अड्डा बन चुके हैं। सुविधाघरों के आसपास व्यापार करने वालों ने नवभारत को बताया कि यहां कोई नहीं जाता क्योंंकि महीनों-महीनों से यहां सफाई नहीं की जाती है। दुर्गंध इतनी कि पास में खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है।
जबकि बाजार क्षेत्रों में मौजूद ये टॉयलेट की उपयोगिता बहुत है फिर भी जिम्मेदारों द्वारा इसका रखरखाव न करना बेहद चौंकाने वाली कार्यशैली समझ में आ रही है। नगर निगम प्रशासन के द्वारा इस पूरी परियोजना में चुप्पी साधी गई है जो कि कई सवाल पैदा कर रही है। शहर की मुख्य सड़कों के किनारे बने इन यूटिलिटी प्वाइंट पर महिलाएं बहुत प्रभावित हैं। जिससे स्वच्छता मिशन अभी भी धरातल पर अधूरा ही पड़ा हुआ है। मॉडयूलर टॉयलेट के पास व्यापार करने वालों ने ये भी बताया कि कई टॉयलेट में लाइट ही नहीं है और कई के दरवाजे भी टूटे पड़े हैं और कहीं पानी ही नहीं रहता है।
इन इलाकों में बनाए गए थे हाईटेक टॉयलेट
जानकारी के अनुसार नगर निगम ने जबलपुर के 11 इलाकों में हाईटेक टॉयलेट बनाए थे जिसमें गोरखपुर, एसबीआई चौक, कृषि उपज मंडी, एमआर फोर, ललपुर और नगर निगम परिसर सहित अन्य क्षेत्र शामिल थे। फाइबर बॉडी युक्त मॉड्यूलर यूटिलिटी का निर्माण कराया गया था जिस पूरी परियोजना में करीब 1.65 करोड़ रुपए की होली खेली गई थी। जबकि एक यूनिट की लागत करीब 15 लाख रुपए आई थी। वहीं सुविधाओ के नाम पर वॉशबेसिन, इंडियन और वेस्टर्न टॉयलेट के साथ दिव्यांगों के लिए रैम्प भी शामिल था, मगर आज इनमें से अधिकांश टॉयलेट इस्तेमाल करने लायक ही नहीं बचे हैं।
