
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने राजकुमार होते हुए भी अपने माता-पिता के आदेश का पालन किया और वनवास स्वीकार किया। जीवन में हर व्यक्ति के लिए उसका कर्म प्रधान होता है। इसलिए हमें अपने कर्म को पूरी ईमानदारी से करते रहना चाहिए, रास्ते अपने आप खुलते चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत, संघर्ष और प्रतिभा देश के लिए गौरव का विषय है। दिव्यांग खिलाड़ियों को केवल खेल के मैदान तक सीमित न रखकर उन्हें समाज में सम्मान, अवसर और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराना भी सामूहिक जिम्मेदारी है। दिव्यांग क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मुकेश कंचन ने कहा, “दिव्यांग क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऑफ इंडिया को आपके रूप में एक मां मिल गई है। बोर्ड को एक ऐसी मां की सख्त जरूरत थी, जो अपने बच्चों को आगे बढ़ने, संघर्ष करने और कर्म करने की प्रेरणा दे सके। हमें विश्वास है कि आपके मार्गदर्शन में दिव्यांग क्रिकेट नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।”
