सार्वजनिक परिवहन किसी भी विकसित होते शहर और प्रदेश की बुनियादी जरूरत है. यह केवल लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों से जुडऩे का सबसे सुलभ साधन भी है. ऐसे में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लोक परिवहन व्यवस्था के विस्तार की पहल स्वागत योग्य है. पहले चरण में सात शहरों में 351 बसों के संचालन की शुरुआत और इंदौर में इंटरसिटी तथा इंट्रासिटी बस सेवाओं के विस्तार से सार्वजनिक परिवहन का दायरा बढऩे की उम्मीद है. इसके साथ पीएम ई-बस सेवा की 25 नई बसें भी इंदौर के परिवहन नेटवर्क को मजबूती देंगी.
लोक परिवहन का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब इसका लाभ केवल बड़े शहरों और प्रमुख मार्गों तक सीमित न रहे. इंदौर, भोपाल , ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन जैसे तेजी से विस्तार कर रहे शहर में बाहरी क्षेत्रों और नई विकसित हो रही बस्तियों तक नियमित बस सेवा पहुंचाना जरूरी है. इसके साथ प्रदेश के उन ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, जहां आज भी लोगों को निजी वाहनों, ऑटो या महंगे वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है. सरकार को नए रूट तय करते समय केवल यात्री संख्या और व्यावसायिक लाभ को आधार नहीं बनाना चाहिए. सामाजिक जरूरत भी रूट निर्धारण का महत्वपूर्ण मानदंड हो.
ऐसे गांव, आदिवासी क्षेत्र, औद्योगिक क्लस्टर, शैक्षणिक संस्थान और स्वास्थ्य केंद्र, जहां सार्वजनिक परिवहन की कमी है, उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए. कम यात्री वाले दूरस्थ रूट पर भी न्यूनतम बस सेवा सुनिश्चित करने के लिए सरकार को विशेष व्यवस्था करनी चाहिए. लोक परिवहन की सफलता का पैमाना केवल यह नहीं होना चाहिए कि कितनी नई बसें सडक़ पर उतरीं, बल्कि यह भी होना चाहिए कि कितने नए क्षेत्र पहली बार नियमित सार्वजनिक परिवहन से जुड़े.
बसों की संख्या बढ़ाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक जरूरी उनका सुरक्षित और भरोसेमंद संचालन है. बसों में सीसीटीवी, इमरजेंसी बटन और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं तभी प्रभावी होंगी, जब उनकी लगातार निगरानी, नियमित रखरखाव और खराब होने पर तत्काल सुधार की व्यवस्था हो. यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा पर अतिरिक्त ध्यान जरूरी है. बसों और प्रमुख बस स्टॉप पर पर्याप्त रोशनी, कार्यशील सीसीटीवी, आपातकालीन सहायता और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था हो. रात के समय चलने वाली बसों के रूट पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए. चालक और परिचालक के प्रशिक्षण में यात्रियों के साथ संवेदनशील व्यवहार तथा आपात स्थिति से निपटने की क्षमता को भी शामिल किया जाना चाहिए.
सरकार की त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था और जिला स्तर की परिवहन समितियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. यह निगरानी केवल कागजी समीक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. बसों की समयबद्धता, सफाई, चालक-परिचालक का व्यवहार, ओवरलोडिंग, शिकायतों के निपटारे और दुर्घटनाओं की नियमित समीक्षा होनी चाहिए.
मध्यप्रदेश सरकार ने लोक परिवहन के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है. अब आवश्यकता इस विस्तार को सुरक्षित, समयबद्ध, सुलभ और सर्वसमावेशी बनाने की है. शहरों में बसों की संख्या बढऩे के साथ दूरदराज के क्षेत्रों को भी परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाए और यात्रियों का भरोसा मजबूत किया जाए. बस सेवा का विस्तार तभी सार्थक होगा, जब वह सुविधा के साथ सुरक्षा और अंतिम छोर तक पहुंच की गारंटी भी बने.
