महू: इंदौर-खंडवा फोरलेन का निर्माण कर रही कंपनी मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की गंभीर लापरवाही क्षेत्र के अन्नदाताओं के लिए बड़ी आफत बन गई है. मानसून की शुरुआती बारिश में ही कंपनी के अधूरे और दोषपूर्ण जल निकासी कार्य के कारण गवालू पंचायत क्षेत्र के खेतों में भारी जलभराव हो गया है. स्थिति इतनी गंभीर है कि पहाड़ी से आया पानी जमा होने के कारण कई खेत तालाब में तब्दील हो गए हैं, जिससे किसानों द्वारा महंगे दामों पर खरीदे गए बीजों से बोई गई सोयाबीन की फसल सड़कर पूरी तरह नष्ट हो गई है.
क्षेत्र के पीड़ित किसान अजय यादव ने बताया कि फोरलेन निर्माण से पहले यहाँ खेतों के पानी की प्राकृतिक निकासी के लिए छोटी-छोटी पुलियाएं बनी हुई थीं. कंपनी ने उन्हें ध्वस्त कर दोनों ओर का पानी एक ही तरफ मोड़ने के लिए पाइप तो डाल दिए, लेकिन इन पाइपों को आगे मुख्य नाले तक नहीं जोड़ा. इसके अलावा, सड़क के दोनों तरफ पक्की की बजाय कच्ची नाली बना दी गई, जो बारिश शुरू होते ही धंस गई.
नतीजा यह हुआ कि ऊपरी पहाड़ी से आने वाला पूरा पानी सीधे किसानों के खेतों में घुस गया. किसानों ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और जिला प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कर स्थायी समाधान करने की मांग की है. वहीं, कंपनी के प्रोजेक्ट हेड नागेश्वर राव का इस संबंध में कहना है कि सड़क के सामने पहाड़ से आने वाले पानी की निकासी के लिए दोनों तरफ कच्ची नाली बनाई गई थी. एक नाली के बंद हो जाने से सारा पानी एक ही तरफ चला गया. जहां तक फसल के नुकसान का सवाल है, तो कंपनी के पास इसका मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है.
