भोपाल: राजधानी के ऐशबाग इलाके में एक बेहद दर्दनाक घटना ने अकेले रह रहे बुजुर्गों की सुरक्षा और सामाजिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुदामा नगर में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपति की मौत कई दिनों तक उनके ही घर के भीतर कैद रही। बाहर बंद दरवाजा था और अंदर जिंदगी की आखिरी कहानी खामोशी से खत्म हो चुकी थी। आसपास रहने वाले लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं हुई।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब दंपति के किरायेदार ने किराया देने के लिए उनके घर पहुंचकर दरवाजा खटखटाया। काफी देर तक आवाज लगाने के बाद भी जब अंदर से कोई जवाब नहीं मिला तो उसे अनहोनी की आशंका हुई। उसने आसपास के लोगों को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस को बुलाया गया।
दरवाजा खुलते ही सामने आया मौत का सच
सूचना मिलते ही ऐशबाग पुलिस मौके पर पहुंची। दरवाजा अंदर से बंद था, इसलिए पुलिस ने उसे खुलवाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर दरवाजा तोड़ना पड़ा। घर के अंदर का दृश्य देखकर पुलिसकर्मी भी स्तब्ध रह गए। बुजुर्ग पति-पत्नी के शव पड़े हुए थे। कई दिन बीत जाने के कारण शव खराब हालत में पहुंच चुके थे।
पुलिस ने मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाए और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। प्रारंभिक जांच में मामला सामान्य मृत्यु का लग रहा है, हालांकि मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।
अकेलेपन में गुम हो गई थी बुजुर्गों की जिंदगी
जांच में सामने आया कि दंपति लंबे समय से अकेले रह रहे थे। उनके बच्चे बाहर रहते हैं और उनका आना-जाना भी सीमित था। बुजुर्ग दंपति अपनी दिनचर्या में भी ज्यादा लोगों के संपर्क में नहीं रहते थे। यही वजह रही कि कई दिनों तक उनके घर से कोई गतिविधि नहीं दिखने पर भी किसी को ज्यादा संदेह नहीं हुआ।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ समय से घर के आसपास दुर्गंध महसूस होने की बात भी सामने आई थी, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि यदि समय रहते सूचना दी जाती तो क्या स्थिति अलग हो सकती थी।
पुलिस जुटा रही मौत से जुड़े सुराग
ऐशबाग पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दंपति की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई। आसपास के लोगों, रिश्तेदारों और परिचितों से जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही घर में मौजूद सामान और अन्य परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है।यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि महानगरों और शहरों में अकेले रह रहे बुजुर्गों की सुध लेने के लिए सामाजिक स्तर पर कितनी सतर्कता जरूरी है। बंद दरवाजे के पीछे हुई इस मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
