
मुंबई, 11 अगस्त (वार्ता) अभिनेता अड़ीवी शेष ने मानसून के दौरान बेसहारा जानवरों, खासकर स्ट्रीट डॉग्स की मदद करने और उनके प्रति संवेदनशीलता बरतने की अपील की है।भारी बारिश जहां लोगों को गर्मी से राहत देती है, वहीं सड़कों पर रहने वाले बेसहारा जानवरों के लिये यह मौसम मुश्किलें बढ़ा देता है। बारिश के दौरान उन्हें भूख, चोट, बीमारी और सुरक्षित ठिकाने की कमी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अड़ीवी शेष ने एक जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों से अपील की है कि वे अपनी क्षमता के अनुसार इन जानवरों की मदद के लिये आगे आएं। उन्होंने स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों और पशु कल्याण संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने, जरूरतमंद जानवरों के लिये अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने, साफ पानी और भोजन देने तथा घायल जानवरों को समय पर उपचार दिलाने का आग्रह किया। अड़ीवी शेष ने कहा, “हममें से बहुत से लोगों के लिये मानसून खूबसूरत मौसम होता है, लेकिन हजारों बेसहारा जानवरों, खासकर स्ट्रीट डॉग्स के लिये यह साल के सबसे मुश्किल समय में से एक बन सकता है। बारिश होने पर हमारे पास वापस लौटने के लिये घर होते हैं, लेकिन उन्हें सूखी जगह, खाना और सुरक्षित ठिकाना तलाशना पड़ता है।”
उन्होंने कहा कि सड़कों पर भरा पानी, तेज रफ्तार ट्रैफिक, संक्रमण और सुरक्षित जगह की कमी इन जानवरों की मुश्किलें बढ़ा देती है। कई बार बारिश में कांपते किसी जानवर के लिये सुरक्षित जगह तलाशना जैसी छोटी-सी कोशिश भी बड़ा बदलाव ला सकती है।
अड़ीवी शेष ने कहा, “मदद करने के लिये आपका एनिमल रेस्क्यूअर होना जरूरी नहीं है। अपने घर के बाहर साफ पानी और खाने का एक कटोरा रखना, तेज बारिश के दौरान किसी बेसहारा जानवर को छत वाली सुरक्षित जगह में कुछ समय के लिये शरण देना या किसी घायल जानवर को देखकर स्थानीय रेस्क्यू संस्था को फोन करना जैसी छोटी-सी कोशिश भी किसी की जान बचा सकती है।
“उन्होंने पशु कल्याण संगठनों, रेस्क्यू कर्मियों और स्वयंसेवकों के काम की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें समाज और समुदाय से हर संभव सहयोग की जरूरत है। उन्होंने लोगों से मानसून के अलावा पूरे वर्ष पशु कल्याण के लिये आगे आने, स्वयंसेवा करने, दान देने, जरूरतमंद जानवरों को अस्थायी आश्रय देने और जागरूकता फैलाने की अपील की। अड़ीवी शेष ने कहा कि दयालुता का मतलब हमेशा कोई बड़ा काम करना नहीं होता, बल्कि यह उन छोटी-छोटी मदद और अच्छे व्यवहार में दिखाई देती है, जिन्हें लोग हर दिन चुनते हैं।
उन्होंने कहा, “हम जानवरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, यह बताता है कि एक समाज के तौर पर हम कौन हैं। वे शब्दों में हमसे मदद नहीं मांग सकते, लेकिन वे हमारी इंसानियत पर निर्भर हैं।” अड़ीवी शेष ने हाउसिंग सोसाइटियों और स्थानीय समुदायों से पशु कल्याण संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने और बारिश के मौसम में बेसहारा जानवरों की मदद सुनिश्चित करने की अपील की।
