
नीमच। जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर गुरुवार को लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। लोकायुक्त की टीम ने विभाग के जिला संयोजक राकेश राठौर और उत्कृष्ट बालक छात्रावास नीमच के अधीक्षक हरीश चौहान को एक लाख रुपए रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ लिया। खास बात यह है कि जिला संयोजक राकेश राठौर का हाल ही में ट्रांसफर हो चुका है। विदाई से पहले ही रिश्वतखोरी का मामला सामने आने से हडक़ंप मच गया।
जानकारी अनुसार लोकायुक्त की टीम की यह कार्रवाई कलेक्टर कार्यालय परिसर में संचालित आदिम जाति कल्याण विभाग के कार्यालय में हुई। जिस परिसर में जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी बैठते हैं, वहीं एक लाख रुपये की रिश्वत का लेन-देन पकड़े जाने से सरकारी कार्यप्रणाली और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
लोकायुक्त डीएसपी दिनेशचंद्र पटेल ने बताया कि शिकायतकर्ता कुर्दुला एक्का, जो कि जूनियर कन्या छात्रावास कुकड़ेश्वर में अधीक्षक हैं, ने शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया गया कि छात्रावास संचालन में अनियमितताओं के चलते कलेक्टर ने उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की थी। जांच में सहयोग करने और उनका लंबित वेतन जारी कराने के नाम पर जिला संयोजक राकेश राठौर और छात्रावास अधीक्षक हरीश चौहान ने 1 लाख 25 हजार की रिश्वत मांगी। शिकायत सही पाए जाने पर डीएसपी दिनेशचंद्र पटेल, निरीक्षक हीना डावर, प्रधान आरक्षक हितेश ललावत, आरक्षक उमेश जाटव, श्याम शर्मा, मोहम्मद इसरार, संजीव कुमारिया, अंजली पुरानिया की टीम बनाई गई। गुरुवार को जैसे ही अधिकारी ने रिश्वत की राशि ली, उन्हें रंगेहाथ दबोच लिया।
दिनभर चलती रही इस विषय की चर्चा
जिले में यह चर्चा का विषय बना कि स्थानांतरण के बाद विभाग छोडऩे की तैयारी कर रहे अधिकारी का नाम इतनी बड़ी रिश्वतखोरी की कार्रवाई में सामने आया है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद आदिम जाति कल्याण विभाग सहित अन्य सरकारी विभागों में भी हलचल देखी जा रही है।
