नयी दिल्ली, 25 जून (वार्ता) ताजे फलों के निर्यात को बढ़ावा देते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान, लखनऊ के सहयोग से सिंगापुर को बंगानापल्ली आमों का पहला व्यावसायिक समुद्री शिपमेंट सफलतापूर्वक भेज दिया है। एक सरकारी विज्ञप्ति में गुरूवार को यह जानकारी दी गयी। आंध्रप्रदेश के इस बेहद रसीले और मीठे आम की किस्म बंगानापल्ली के पांच टन की यह खेप 11 जून को रवाना हुई और वह 24 जून को सिंगापुर पहुँची।
यह सफल प्रयास भारत के बागवानी उत्पादों के लिए कम लागत वाली और टिकाऊ निर्यात व्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ विदेशों में भारतीय आमों की बाजार पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इन आमों को आंध्र प्रदेश के प्रमाणित बागों से लेकर कर्नाटक में एपीडा से मान्यता प्राप्त केंद्र में प्रसंस्कृत और पैक किया गया । यह पूरी प्रक्रिया सिंगापुर के गुणवत्ता और पादप-स्वच्छता मानकों के अनुरूप पूरी की गई। एपीडा के अनुसार, सिंगापुर के आयातक ईसी-लिंक्स प्राइवेट लिमिटेड ने वहां पहुँचने पर फलों की गुणवत्ता को उत्कृष्ट बताया। उन्होंने आमों की मिठास, एक समान पकने की प्रक्रिया, लंबे समय तक ताजा रहने की क्षमता और उनकी बेहतर स्थिति की सराहना की। इस शिपमेंट ने आयात की सभी शर्तों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
इससे समुद्री परिवहन के दौरान वैज्ञानिक रख-रखाव और शीत (कोल्ड चेन) प्रबंधन की प्रभावशीलता का पता चलता है। इस निर्यात से किसानों को भी बड़ा आर्थिक लाभ हुआ है। घरेलू बाजार में जहां इस किस्म के आम की कीमत 25 से 26 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच थी, वहीं इस निर्यात खेप से किसानों को लगभग 50 रुपये प्रति किलोग्राम का भाव मिला। इससे किसानों की आय लगभग दोगुनी हो गई और उनके मुनाफे में भारी वृद्धि हुई। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा कि इस सफल निर्यात से यह स्पष्ट हो गया है कि ताजे फलों के परिवहन के लिए समुद्री मार्ग एक किफायती, और व्यावहारिक माध्यम है। गौरतलब है कि बंगानापल्ली आम भारत की सबसे लोकप्रिय किस्मों में से एक है, जो अपने सुनहरे पीले रंग, मनमोहक खुशबू, बिना रेशे वाले गूदे और अत्यधिक मिठास के लिए जानी जाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी भारी मांग है और भारत के आम निर्यात को बढ़ाने में इसकी बड़ी भूमिका है। सिंगापुर को दी गई इस सफलता से बागवानी निर्यात के लिए समुद्री परिवहन के उपयोग को बल मिलने और वैश्विक बाजार में उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की प्रतिष्ठा और मजबूत होने की उम्मीद है।

