सीहोर। शहर में लगातार बढ़ते अतिक्रमण को लेकर प्रशासन द्वारा शुरू की गई कार्रवाई पहले ही दिन विवादों में घिर गई. कलेक्टर के निर्देश पर नपा द्वारा शहर के प्रमुख मार्गों और सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने की मुहिम मंगलवार को शुरू की गई थी, लेकिन दिनभर चले घटनाक्रम के बाद शाम होते-होते यह अभियान ठंडा पड़ गया.
मंगलवार सुबह मुख्य नगर पालिका अधिकारी सुधीर कुमार नगर पालिका अमले के साथ नगर भ्रमण पर निकले. इस दौरान वह पुराने हाईवे क्षेत्र में पहुंचे. चर्च मैदान के बाहर सरकारी भूमि पर संचालित जूते-चप्पल की एक दुकान को लेकर उन्होंने दुकानदार को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए. मौके पर सीएमओ के सख्त तेवर देखने को मिले और दुकानदार को फटकार लगाते हुए अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया. इस पूरी कार्रवाई का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया.
वीडियो सामने आने के बाद शहर में कार्रवाई को लेकर बहस छिड़ गई. कई जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने सीएमओ के व्यवहार पर आपत्ति जताई. सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासन को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तो करनी चाहिए, लेकिन गरीब और छोटे व्यापारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार भी आवश्यक है. कुछ लोगों ने इसे गरीबों की आजीविका पर प्रहार बताते हुए प्रशासनिक कार्यशैली की आलोचना की. विवाद के बावजूद नपा ने दोपहर में चर्च मैदान के बाहर लगने वाली दुकानों और अन्य अस्थायी अतिक्रमणों को हटाने के लिए मुनादी करवाई. मुनादी के माध्यम से संबंधित व्यापारियों और दुकानदारों को शाम 4 बजे तक स्वयं अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी गई. नगर पालिका की ओर से स्पष्ट किया गया कि निर्धारित समय के बाद अमला मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करेगा.
हालांकि मुनादी का वीडियो और सूचना भी सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई. इसके बाद नपा की प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर विरोध के स्वर और तेज हो गए. स्थानीय लोगों, व्यापारियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा इसे लेकर सवाल उठाए जाने लगे. बताया जा रहा है कि बढ़ते विरोध और जनभावनाओं को देखते हुए नगर पालिका प्रशासन ने फिलहाल इस कार्रवाई को स्थगित कर दिया.
शाम तक चर्च मैदान क्षेत्र में किसी प्रकार की बड़ी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई नहीं हो सकी. जिस अभियान की शुरुआत सुबह सख्त तेवरों के साथ हुई थी, वह दिन ढलते-ढलते ठंडी पड़ती नजर आई. शहर में यह चर्चा का विषय बना रहा कि प्रशासन जिस अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर गंभीर दिखाई दे रहा था, वह पहले ही दिन अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका. उल्लेखनीय है कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या बनी हुई है. प्रशासन द्वारा समय-समय पर कार्रवाई की घोषणाएं की जाती रही हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है. ऐसे में मंगलवार की यह मुहिम भी पहले ही दिन टांय-टांय फिस्स साबित होती दिखाई दी. अब देखना होगा कि नपा आगे इस अभियान को किस रणनीति के साथ दोबारा शुरू करती है.
