
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी जबलपुर की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय मानते हुए पुनर्मूल्यांकन की मांग करने वाले दो छात्रों की याचिकाएं निरस्त कर दीं। कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
हाईकोर्ट ने उक्त निर्देश जबलपुर निवासी बीएचएमएस छात्र अमरजीत भारद्वाज तथा एमएससी नर्सिंग छात्रा प्रेमलता तिवारी की याचिकाओं पर सुनाया। दोनों ने दावा किया था कि उत्तर पुस्तिकाओं में कुछ उत्तर सही चिन्हित होने के बावजूद उनके अंक नहीं जोड़े गए। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए हाईकोर्ट ने उत्तर पुस्तिकाओं का स्वतंत्र विशेषज्ञों से पुनर्मूल्यांकन कराया। जांच में नर्सिंग छात्रा के अंक यथावत रहे, जबकि बीएचएमएस छात्र को पहले से भी कम अंक मिले।
