ग्वालियर: स्मार्ट सिटी द्वारा करीब 65 करोड़ रुपए की लागत से जलालपुर रोड पर बनाया गया इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) बसों की आवा-जाही से गुलजार हो गया। सुबह 7 बजे से बसें वहां पहुंचना शुरु हुई और निर्धारित समय तक रुकने के बाद भिंड-मुरैना के लिए रवाना हुईं। आईएसबीटी से बसों का संचालन प्रारंभ करने के लिए सांसद, ऊर्जा मंत्री, कलेक्टर, आरटीओ तथा बस ऑपरेटरों की बैठक हुई थी। इस बैठक में निर्णय हुआ था कि पहले चरण में भिंड, मुरैना तक जाने वाली बसें आईएसबीटी से होकर जाएंगी, भले ही सवारी मिलें या नहीं, लेकिन कुछ मिनट तक रुकना जरूर होगा। इसका असर यह हुआ कि बसें वहां पहुंची, रुकीं और रवाना हुईं। वहीं दूसरी तरफ अन्य राज्यों से आने वाली बसें आईएसबीटी के सामने से होती हुईं सीधे पड़ाव बस स्टैंड पहुंची। इस दौरान न तो प्रशासन और न ही आरटीओ विभाग के अफसर कहीं नजर आए।
आईएसबीटी का निर्माण करने वाली कंपनी को ही स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा उसके प्रबंधन का जिम्मा दिया है। इसके एवज में स्मार्ट सिटी को वार्षिक आय प्राप्त होगी। अंतरराज्यीय बस स्टैंड पर सिक्योरिटी गार्ड, सफाई कर्मचारी, बसों की रसीद काटना, मैनेजर आदि को तैनात कर दिया गया है। बस स्टैंड पर एनाउंसमेंट सिस्टम लगाया गया है, जिससे यात्रियों को सुविधा हो और वह इधर-उधर नहीं भटकें।
आईएसबीटी से बसों का संचालन करने के लिए बस ऑपरेटर पहले तैयार नहीं थे। हालांकि बाद में शासन-प्रशासन की समझाइश के बाद वह इस बात पर तैयार हो गए थे कि बसें चलेंगी तो पुराने बस स्टैंड से ही, लेकिन कुछ मिनट का स्टापेज आईएसबीटी पर करेंगे। सवारी मिली तो ठीक, नहीं मिली तो रुकने के बाद गंतव्य के लिए निकल जाएंगे। इस बार बस ऑपरेटर अपने वादे पर कायम रहे और बिना किसी दबाव के उनकी बसें आईएसबीटी से होकर गईं। सुबह 7 बजे से बसों के पहुंचने का क्रम चालू हुआ है जो खबर लिखे जाने तक जारी था।
भिंड, मुरैना जाने वाली तथा वहां से आने वाली बसें अभी मेंटल हॉस्पिटल तिराहा तथा स्टेशन बजरिया स्थित बस स्टैंड से आना-जाना करती हैं। इससे ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होती है, क्योंकि एक बस के जाते ही दूसरी बस जाने के लिए तैयार रहती है। इनकी टाइमिंग के बीच 5 से 10 मिनट का अंतर रहता है
