भोपाल। मध्यप्रदेश में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं ने बिजली कंपनियों की सरप्लस बिजली खरीद नीति पर सवाल खड़े किए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि उनसे अतिरिक्त सौर बिजली सिर्फ 2.15 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी जा रही है, जबकि यही बिजली 8 से 10 रुपये प्रति यूनिट तक की दर से उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जा रही है। इस अंतर को लेकर मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग में कई आपत्तियां दर्ज की गईं, जिन पर जनसुनवाई की गई।
आयोग ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर संयंत्र लगाने वाले उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए नियमों में संशोधन का प्रस्ताव जारी किया है। प्रस्ताव में कुछ सर्विस चार्ज हटाने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव पर उपभोक्ताओं और विभिन्न संगठनों की ओर से एक दर्जन से अधिक सुझाव और आपत्तियां सामने आई हैं।
जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं ने सरप्लस बिजली की खरीद दर तय करने के आधार पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि बड़े सोलर उत्पादकों से इतनी कम दर पर बिजली खरीदने का उदाहरण नहीं है, तो घरेलू सोलर उपभोक्ताओं के लिए यह दर क्यों लागू की जा रही है।
उपभोक्ताओं ने रिन्यूएबल एनर्जी मीटर लगाने और दो रुपये प्रति यूनिट फिक्स चार्ज समाप्त करने की मांग भी रखी। महाकोशल चेंबर ऑफ कॉमर्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शंकर नागदेव ने कहा कि सोलर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त बिजली वापस लेने पर फिक्स चार्ज वसूलना योजना की भावना के विपरीत है। उनका दावा है कि इस तरह का प्रावधान संभवतः केवल मध्यप्रदेश में लागू है।
