होर्मुज से अरबों डॉलर तक… एक समझौते ने बदल दिया मिडिल ईस्ट का खेल, पॉइंट्स में जानिए डील की प्रमुख बातें

ईरान और अमेरिका ने 107 दिनों के तनाव के बाद शांति समझौते पर सहमति जताई है। इसके तहत होर्मुज खुलेगा, प्रतिबंध हटेंगे और ईरान को उसका जब्त फंड वापस मिलेगा।

ईरान और अमेरिका के बीच पिछले 107 दिनों से जारी भीषण तनाव अब खत्म होने की कगार पर है। दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक 14 सूत्रीय समझौते (MoU) पर सहमति व्यक्त की है, जिस पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आधिकारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते को वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़े टर्निंग पॉइंट के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच युद्धविराम पहले से ही प्रभावी हो चुका है।

अब खुलेगा होर्मुज
इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना है। ईरान ने सहमति जताई है कि वह अगले 4 से 30 दिनों के भीतर होर्मुज पर लगाए गए अपने सैन्य अवरोधों को पूरी तरह हटा लेगा, जिससे सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए मार्ग खुल जाएगा।

इस रास्ते के खुलने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति सुचारू होगी, जिससे पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमतों में बड़ी गिरावट आने की संभावना है। वर्तमान में कच्चा तेल 84 डॉलर के नीचे ट्रेड कर रहा है, जो दुनिया के लिए एक बड़ी खुशखबरी है।

US- ईरान समझौते के प्रमुख बिंदु
ईरानी अधिकारियों और मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस 14 सूत्रीय समझौते में कई रणनीतिक बदलाव शामिल हैं।

लेबनान और अन्य मोर्चों पर तत्काल प्रभाव से युद्ध रोका जाएगा।
अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद करेगा।
अगले 30 दिनों के भीतर अमेरिका ईरान पर लागू नौसैनिक नाकेबंदी हटा लेगा।
ईरान की सीमाओं के पास से अमेरिकी सेना की वापसी होगी।
ईरान 30 दिनों के भीतर होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पूरी तरह खोल देगा।
तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाया जाएगा।
ईरान के पुनर्निर्माण के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी 300 अरब डॉलर का एक व्यापक प्लान पेश करेंगे।

परमाणु मुद्दे और फ्रीज फंड की वापसी
समझौते के अगले चरण में ईरान को आर्थिक राहत दी जाएगी। अमेरिका ईरान के जब्त किए गए 24 अरब डॉलर के फंड को किस्तों में जारी करने पर सहमत हुआ है। इसके बदले में ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अपने पास मौजूद उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करेगा। अगले 60 दिनों के भीतर परमाणु मुद्दों, मिसाइल प्रोग्राम और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों समेत सभी शेष विषयों पर अंतिम व्यापक समझौता किया जाएगा।

क्रेडिट लेने की मची होड़
इस समझौते के दौरान कूटनीतिक क्रेडिट लेने की भी होड़ मची रही। पाकिस्तान ने पुरजोर कोशिश की कि इस ऐतिहासिक शांति समझौते का पूरा श्रेय उसे मिले, हालांकि इसमें उसे सफलता नहीं मिल पाई। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस 14 सूत्रीय समझौते की पुष्टि की है।

दिलचस्प बात यह है कि इस मसौदे में लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी संघर्ष का सीधा उल्लेख नहीं किया गया है, जिसे अमेरिका ने एक अलग विषय करार दिया है। यह समझौता न केवल दो देशों के बीच की दुश्मनी को कम करेगा, बल्कि मध्य-पूर्व में स्थिरता लाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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