एलिवेटेड ब्रिज ने रोकी रोपवे की राह

उज्जैन: रोप वे बनाए जाने की योजना हाल फिलहाल खटाई मेँ पड़ते दिखाई दें रही है. आधुनिक परिवहन सुविधा देने का दावा करने वाली रोपवे परियोजना कागजों पर तो कायम है, जमीन पर उसकी रफ्तार थम गई है. एलिवेटेड ब्रिज और रोपवे के बीच तालमेल बनने तक महाकाल नगरी का यह ड्रीम प्रोजेक्ट प्रतीक्षा की पटरी पर खड़ा नजर आ रहा है.

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 15 मार्च 2024 को इसकी घोषणा करते हुए 200 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी थी. दावा किया गया था कि यह परियोजना श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन से सीधे महाकाल मंदिर तक मात्र 5 से 7 मिनट में पहुंचाने में सक्षम होगी, लेकिन अब यह महत्वाकांक्षी योजना अनिश्चितता के दौर से गुजरती दिखाई दे रही है. नवभारत को मिली जानकारी के अनुसार लगभग 1.7 किलोमीटर लंबे रोपवे के लिए प्रारंभिक तैयारियां शुरू हुई थीं, लेकिन वर्तमान में निर्माण गतिविधियां पूरी तरह ठप हैं. अधिकारियों का कहना है कि रोपवे बनेगा जरूर, अब इसकी प्रगति फिलहाल रुक गई है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण शहर में प्रस्तावित एलिवेटेड ब्रिज परियोजना को माना जा रहा है.

सीईओ ने किए थे दावे
योजना से जुड़े तकनीकी पक्ष को लेकर पूर्व में डोप्पलमेयर कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रफुल्ल चौधरी ने दावा किया था कि यह तकनीक सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी. डोप्पलमेयर कंपनी इस परियोजना की तकनीकी सहयोगी है, जबकि नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) इसकी कंसल्टिंग एवं समन्वय एजेंसी तथा एमएसआईएल निर्माण एजेंसी के रूप में कार्य कर रही है.

ब्रिज को बता रहे कारण
वर्तमान स्थिति में रोपवे परियोजना को लेकर तस्वीर साफ नहीं है. जिम्मेदार अधिकारी खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं. सूत्रों के अनुसार मकोड़िया आम क्षेत्र से इंदौर गेट और इंदौर गेट से निकास चौराहे तक प्रस्तावित एलिवेटेड ब्रिज की विस्तृत तैयारियां चल रही हैं. माना जा रहा है कि दोनों परियोजनाओं के मार्ग, संरचनात्मक डिजाइन तथा भूमि उपयोग संबंधी पहलुओं को लेकर समन्वय की प्रक्रिया जारी है. इसी कारण रोपवे के अंतिम स्वरूप और निर्माण कार्यक्रम पर फिलहाल निर्णय नहीं लिया जा रहा.

मुख्यमंत्री ने तारीफ की थी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस परियोजना को उज्जैन के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण बताया था. उन्होंने कहा था कि रोपवे न केवल तीर्थयात्रियों को त्वरित आवागमन की सुविधा देगा बल्कि पर्व और सिंहस्थ के दौरान शहर में बढ़ने वाले यातायात दबाव को भी कम करेगा.

तीन स्टेशन प्रस्तावित
जानकारी के मुताबिक रोपवे के तीन स्टेशन प्रस्तावित हैं. पहला स्टेशन रेलवे स्टेशन परिसर में, दूसरा महाकाल लोक क्षेत्र में तथा तीसरा गणेश कॉलोनी स्थित नूतन स्कूल के पास बनाया जाना है. यह रोपवे अत्याधुनिक मोनोकेबल डिटेचेबल तकनीक पर आधारित होगा, जिसमें 50 से अधिक केबिन संचालित किए जाने की योजना है. एक मोटर आधारित प्रणाली से संचालित होने वाले इस रोपवे में प्रति घंटे लगभग 8 हजार यात्रियों को यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था.

50 रूपये किराया
परियोजना के तहत श्रद्धालु रेलवे स्टेशन से सीधे महाकाल मंदिर क्षेत्र तक पहुंच सकेंगे. प्रारंभिक आकलन के अनुसार प्रति यात्री किराया लगभग 50 रुपए प्रस्तावित किया गया था. रोपवे प्रतिदिन लगभग 16 घंटे संचालित किया जाना था, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था पर दबाव कम होने के साथ तीर्थयात्रियों को बड़ी सुविधा मिलती

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