अन्नाद्रमुक में इस्तीफों का सिलसिला जारी, स्टालिन ने मुख्यमंत्री पर तंज कसा

चेन्नई, 13 जून (वार्ता) तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक के नेताओं का पार्टी छोड़ने का सिलसिला जारी है और पूर्व सांसद एन. बालगंगा और कुछ पूर्व विधायकों ने पार्टी छोड़कर सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) का दामन थाम लिया है।

टीवीके को शनिवार को उस समय एक और बड़ी ताकत मिली जब कांग्रेस की तीन बार की पूर्व विधायक सुश्री विजयधारणी ने भी भाजपा को छोड़ दिया और मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की पार्टी में शामिल हो गयीं। मुख्य विपक्षी दल द्रमुक ने मुख्यमंत्री विजय पर अन्नाद्रमुक विधायकों की ‘राजनीतिक खरीद-फरोख्त’ में शामिल होने का आरोप लगाया है।

मंत्री और टीवीके के महासचिव आनंद और आधाव अर्जुना की उपस्थिति में श्री बालगंगा और पूर्व विधायक, टीवीके में शामिल हुये।

अन्नाद्रमुक से वर्तमान विधायकों के इस्तीफे, पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों और अन्य जिला पदाधिकारियों के लगातार पार्टी छोड़ने तथा टीवीके में शामिल होने के मद्देनजर द्रमुक अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने श्री विजय पर तंज कसा। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री द्वारा विधायकों की ‘राजनीतिक खरीद-फरोख्त’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि उनमें खुद के आत्मविश्वास और उनकी सरकार का समर्थन करने वाले दलों के भरोसे की कमी है।

श्री स्टालिन ने श्री विजय की पार्टी की इस कथित राजनीतिक कार्रवाई को गैर-भाजपा शासित राज्यों में भगवा दल द्वारा की जाने वाली घटनाओं की हूबहू नकल बताया। उन्होंने कहा कि टीवीके की यह कार्रवाई भाजपा की कार्यप्रणाली की फोटोकॉपी है।

इस बीच, टीवीके को तब एक अप्रत्याशित बढ़ावा मिला जब सुश्री विजयधारणी ने भाजपा का साथ छोड़ दिया। सुश्री विजयधारणी का दक्षिणी कन्याकुमारी जिले में काफी प्रभाव है। वह यहां की विलावनकोड सीट से तीन बार राज्य विधानसभा के लिए चुनी गयी थीं। बताया जाता है कि उन्होंने संभवतः पार्टी में कोई पद न मिलने से नाराज होकर भाजपा छोड़ी है। वह श्री आनंद तथा श्री अर्जुना की उपस्थिति में टीवीके में शामिल हुईं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीवीके में सुश्री विजयधारणी के शामिल होने से दक्षिणी तमिलनाडु, विशेष रूप से कन्याकुमारी जिले में पार्टी को मजबूती मिल सकती है।

हाल के दिनों में अन्नाद्रमुक और अन्य राजनीतिक दलों के नेता बड़ी संख्या में टीवीके में शामिल हुये हैं। तमिलनाडु की राजनीति पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि प्रतिद्वंद्वी दलों के नेताओं को आकर्षित करने की टीवीके की क्षमता उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। चूंकि राजनीतिक दल भविष्य के चुनावों की तैयारी कर रहे हैं, इसलिए आने वाले समय में और भी राजनीतिक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।

 

 

 

 

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