हैदराबाद | स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की नवीनतम रिपोर्ट ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अपनी परमाणु क्षमता में निरंतर वृद्धि करते हुए अब 190 परमाणु वॉरहेड हासिल कर लिए हैं, जो पाकिस्तान के 170 वॉरहेड की तुलना में अधिक हैं। भारत अपने आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत लंबी दूरी के मिसाइल सिस्टम, विशेषकर अग्नि-V जैसे हथियारों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए एक रणनीतिक चुनौती है।
सैन्य खर्च और आयात में भारत का दबदबा
भारत का रक्षा बजट 2025 में 92.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो इसे दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बनाता है। पिछले वर्ष की तुलना में भारत के रक्षा व्यय में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही, 2021-2025 के आंकड़ों के मुताबिक भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक है, जो पाकिस्तान की तुलना में लगभग दोगुना रक्षा साजो-सामान खरीद रहा है, जिससे दक्षिण एशिया में सुरक्षा संतुलन भारत के पक्ष में झुकता दिख रहा है।
बढ़ते वैश्विक तनाव और साइबर खतरे
सिपरी की रिपोर्ट ने दुनिया भर में बढ़ते संघर्षों पर भी चिंता व्यक्त की है। 2025 में हथियारबंद लड़ाइयों की संख्या बढ़कर छह हो गई है, जिनमें भारत-पाकिस्तान के बीच का तनाव भी शामिल है। अब इन संघर्षों में साइबर ऑपरेशंस को भी हथियारों की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर सैन्य खर्च 2.9 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर है, जो संकेत देता है कि बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच सभी प्रमुख देश अपनी सुरक्षा तैयारियों को और अधिक मजबूत करने में जुटे हैं।

