आज की युवा पीढ़ी की भावनाओं और संघर्षों को दर्शाता है ‘ये फितूर तेरा’

मुंबई, 30 जुलाई (वार्ता) आज की युवा पीढ़ी की सोच, भावनाओं और अपनी पहचान की तलाश को केंद्र में रखकर बनाया गया स्टार प्लस का नया शो ‘ये फितूर तेरा’ कॉलेज जीवन, रिश्तों और आत्म-खोज की कहानी के जरिए जेन-जी के सपनों, संघर्षों और बदलते नजरिये को पर्दे पर पेश करता है। देशभर के कॉलेज परिसरों और सोशल मीडिया मंचों पर पिछले कुछ समय से युवाओं की आवाज पहले से अधिक मुखर होकर सामने आई है। आज की पीढ़ी अपनी सोच, भावनाओं और पहचान को खुलकर अभिव्यक्त करने में विश्वास रखती है और यही बदलाव मनोरंजन जगत की कहानियों में भी दिखाई देने लगा है।

अब दर्शकों की पसंद उन किरदारों की ओर बढ़ रही है जो पूरी तरह आदर्श नहीं हैं, बल्कि वास्तविक जीवन की तरह भावनाओं, संघर्षों और कमियों से भरे हुए हैं। ऐसे पात्र दर्शकों को सोचने और उनसे जुड़ने का अवसर देते हैं। अभिनेता शाहिद कपूर का चर्चित किरदार ‘कबीर सिंह’ इसका उदाहरण माना जाता है, जिसने दर्शकों के बीच बहस और चर्चा को जन्म दिया था। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए स्टार प्लस का नया शो ‘ये फितूर तेरा’ युवा पीढ़ी की भावनाओं, सपनों और संघर्षों को केंद्र में रखता है। कॉलेज की पृष्ठभूमि पर आधारित यह कहानी केवल प्रेम तक सीमित नहीं है, बल्कि उन युवाओं की यात्रा को दर्शाती है जो अपनी पहचान बनाने और जीवन में अपना रास्ता खोजने का प्रयास कर रहे हैं।

शो का प्रमुख किरदार जीत पारंपरिक टीवी नायक की छवि से अलग है। वह जिद्दी, भावुक और कई बार दिल की सुनकर फैसले लेने वाला युवा है। वहीं सौम्या एक ऐसी युवती है जो नई परिस्थितियों में अपने आत्मविश्वास, आशंकाओं और सपनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है। दोनों पात्रों की कहानी आज के युवाओं के अनुभवों और भावनात्मक संघर्षों को करीब से दर्शाती है। ‘ये फितूर तेरा’ स्टार प्लस के लिए भी एक नई दिशा का संकेत माना जा रहा है। पारिवारिक कहानियों और मजबूत महिला किरदारों के लिए पहचान रखने वाला चैनल अब युवा वर्ग की आकांक्षाओं और कॉलेज जीवन से जुड़ी कहानियों को भी प्रमुखता दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आज का युवा दर्शक ऐसे पात्रों और कहानियों को पसंद करता है जो वास्तविक जीवन के करीब हों। वह ऐसे किरदारों को देखना चाहता है जो गलतियां करते हैं, उनसे सीखते हैं और आगे बढ़ते हैं। ‘ये फितूर तेरा’ अपने पात्रों की कमियों का महिमामंडन करने के बजाय उनके व्यवहार के पीछे छिपी भावनाओं और परिस्थितियों को समझने का प्रयास करता है। यही कारण है कि यह कहानी आज की युवा पीढ़ी के अनुभवों और सोच से जुड़ी हुई महसूस होती है। जब युवा वर्ग अपनी पहचान और अपनी आवाज को लेकर पहले से अधिक सजग और मुखर है, ऐसे समय में ‘ये फितूर तेरा’ उनकी भावनाओं, सपनों और जुनून को छोटे पर्दे पर प्रस्तुत करने का प्रयास करता है।

.....

Next Post

63 वर्ष की हुई मंदाकिनी

Thu Jul 30 , 2026
मुंबई, 30 जुलाई (वार्ता) बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री मंदाकिनी आज 63 वर्ष की हो गयीं।मंदाकिनी का जन्म 30 जुलाई 1963 को मेरठ में एक एंग्लो-इंडियन परिवार में हुआ था। उनके पिता जोसफ ब्रिटिश नागरिक थे, जबकि उनकी मां मुस्लिम थीं। मंदाकिनी का बचपन का नाम यास्मीन जोसेफ था। उन्होंने अपने […]

You May Like