लंदन, 09 जून (वार्ता) ब्रिटेन में ब्रैडफोर्ड ईस्ट के सांसद इमरान हुसैन ने ‘पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में संचार बंदी और मानवाधिकारों’ के मुद्दे पर ब्रिटेन की संसद में एक अर्ली डे मोशन (ईडीएम) पेश किया है और सांसदों से इसका समर्थन करने की अपील की है। श्री हुसैन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि विदेश सचिव को भेजे गये पत्र का 50 से अधिक सांसदों द्वारा समर्थन किये जाने के बाद उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पीओके की स्थिति को लेकर यह प्रस्ताव संसद में पेश किया है।
प्रस्ताव में पीओके में संचार सेवाओं के बंद रहने, लॉकडाउन जैसे प्रतिबंधों, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और छापेमारी की खबरों पर गंभीर चिंता जतायी गयी है। इसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के खिलाफ कथित रूप से अत्यधिक या गैरकानूनी बल प्रयोग की निंदा की गयी है। प्रस्ताव में कहा गया है कि क्षेत्र में संचार सेवाएं बाधित होने के कारण ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी मूल के लोग तथा वहां मौजूद ब्रिटिश नागरिक अपने परिजनों और परिचितों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, जिससे वे चिंतित हैं। इसमें घायल लोगों के लिए चिकित्सा सुविधाओं, हिरासत में लिये गये लोगों के कानूनी अधिकारों तथा प्रशासन और नागरिक समाज के बीच संवाद की कमी पर भी चिंता व्यक्त की गयी है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि संवैधानिक सुधार, लोकतांत्रिक समानता, जवाबदेह शासन, अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण सभा को अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें संचार सेवाओं की तत्काल बहाली, परिवारों के बीच संपर्क पर लगी पाबंदियों को हटाने, घायल लोगों के लिए सुरक्षित चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने, शांतिपूर्ण सभाओं की सुरक्षा तथा हिरासत में लिये गये लोगों की रिहाई या उन्हें शीघ्र अदालत में पेश करने की मांग की गयी है।
प्रस्ताव में पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर प्रशासन से लॉकडाउन समाप्त करने, सभी संचार सेवाएं बहाल करने तथा कश्मीरी लोगों के मानवाधिकारों के सम्मान के साथ बातचीत और वार्ता की प्रक्रिया फिर से शुरू करने का आग्रह किया गया है। साथ ही ब्रिटिश सरकार से राजनयिक माध्यमों का उपयोग कर प्रतिबंध हटाने, संचार सेवाएं बहाल कराने, प्रभावित ब्रिटिश नागरिकों को कांसुलर सहायता उपलब्ध कराने तथा स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए तत्काल प्रयास करने की अपील की गयी है। इस प्रस्ताव के प्रमुख समर्थकों में सांसद ताहिर अली, रिचर्ड बर्गन, अयूब खान, जारा सुल्ताना और मोहम्मद यासीन शामिल हैं।

