
मुम्बई। हर फिल्म का मकसद सिनेमा की परिभाषा बदलना नहीं होता। कुछ फिल्में सिर्फ दर्शकों को दो घंटे तक मुस्कुराने, हंसाने और भावुक करने के लिए बनाई जाती हैं। ‘दुल्हनिया ले आएगी’ भी ऐसी ही एक फिल्म है। यह पुराने दौर के बॉलीवुड रोमांस और पारिवारिक मनोरंजन की खुशबू लिए हुए आती है। कहानी नई नहीं है, लेकिन इसकी प्रस्तुति, कलाकारों की ईमानदार परफॉर्मेंस और हल्के-फुल्के अंदाज की वजह से यह आखिर तक बांधे रखती है। हालही में रिलीज हुई फिल्म- “दुल्हनिया ले आएगी” में स्टार कास्ट महेश मांजरेकर, पीयूष मिश्रा, खुशाली कुमार, ओमकार कपूर, स्नेहिल दीक्षित मेहरा (बीसी आंटी) तथा फिल्म के
निर्देशक आकाशादित्य लामा हैं। जिसकी रेटिंग: 3.5 स्टार है।
फिल्म की कहानी नव्या (खुशाली कुमार) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी उम्र 32 साल हो चुकी है। परिवार की सबसे बड़ी चिंता उसकी शादी है। जब आखिरकार उसकी शादी की बात आगे बढ़ती है, तो हालात अचानक दिलचस्प मोड़ ले लेते हैं। एक नहीं, बल्कि कई दूल्हे उसकी जिंदगी में दस्तक देने लगते हैं और यहीं से शुरू होता है कॉमेडी, कन्फ्यूजन और इमोशंस से भरा सफर। आखिर नव्या का जीवनसाथी कौन बनेगा और इस पूरे घटनाक्रम के पीछे असली कहानी क्या है, यही फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण है। अच्छी बात यह है कि निर्देशक इस सस्पेंस को अंत तक बरकरार रखते हैं और कहीं भी कहानी को अनावश्यक रूप से भारी नहीं होने देते।
अगर फिल्म देखने की सबसे बड़ी वजह किसी एक कलाकार को माना जाए, तो वह खुशाली कुमार है। यह उनकी अब तक की सबसे सहज और आत्मविश्वास से भरी परफॉर्मेंस में से एक है। उन्होंने नव्या के किरदार को सिर्फ निभाया नहीं, बल्कि उसे महसूस कराया है। कॉमिक सीन्स में उनका टाइमिंग प्रभावशाली है, रोमांटिक दृश्यों में वह स्वाभाविक लगती हैं और भावनात्मक पलों में उनकी आंखें संवादों से ज्यादा असर छोड़ती हैं। स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी लगातार कहानी को मजबूती देती है। पिछले कुछ वर्षों में खुशाली ने जिस तरह कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों का चुनाव किया है, यह फिल्म उस सफर को और मजबूत बनाती है। यह कहना गलत नहीं होगा कि ‘दुल्हनिया ले आएगी’ पूरी तरह खुशाली कुमार के कंधों पर टिकी फिल्म है और वह इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाती हैं।
फिल्म के अनुभवी कलाकार भी इसे बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। महेश मांजरेकर अपने सीमित स्क्रीन टाइम में भी प्रभाव छोड़ते हैं। उनके संवाद और स्क्रीन प्रेजेंस हर दृश्य को वजन देते हैं। वहीं पीयूष मिश्रा अपने चिर-परिचित अंदाज में किरदार में गहराई और विश्वसनीयता जोड़ते हैं। ओमकार कपूर अपने किरदार में सहज हैं और कहानी की रफ्तार बनाए रखते हैं। स्नेहिल दीक्षित मेहरा भी अपने हिस्से का काम ईमानदारी से करती हैं और फिल्म के हल्के-फुल्के माहौल में अच्छा योगदान देती हैं। सहायक कलाकारों की पूरी टीम फिल्म को एक पारिवारिक एहसास देने में सफल रहती है।
तकनीकी पक्ष की बात करें तो निर्देशक ने कहानी को अनावश्यक ट्विस्ट्स से बचाकर सरल रखा है। सिनेमैटोग्राफी रंगीन और आकर्षक है, खासकर शादी और पारिवारिक समारोह वाले दृश्य बड़े पर्दे पर अच्छे लगते हैं। कैमरा वर्क कहानी की ऊर्जा को बनाए रखता है। फिल्म का संगीत इसकी टोन के अनुरूप है और गाने कहानी के बीच रुकावट नहीं बनते। बैकग्राउंड स्कोर भी कॉमेडी और इमोशनल सीन्स का प्रभाव बढ़ाने में सफल रहता है। हालांकि एडिटिंग दूसरे हाफ में थोड़ी और कसी जा सकती थी, क्योंकि कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे महसूस होते हैं। हम इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार देते हैं।
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी अनुमानित पटकथा है। कई मोड़ ऐसे हैं जिनका अंदाजा पहले से लगाया जा सकता है। लेकिन इसके बावजूद फिल्म अपनी सकारात्मक ऊर्जा, साफ-सुथरे मनोरंजन और कलाकारों की शानदार परफॉर्मेंस की वजह से कमजोर नहीं पड़ती।
कुल मिलाकर, ‘दुल्हनिया ले आएगी’ ऐसी फिल्म है जो बड़े दावे नहीं करती, लेकिन दिल जीतने की पूरी कोशिश करती है। और इस कोशिश को सबसे ज्यादा सफल बनाती हैं खुशाली कुमार, जिनका अभिनय इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आता है। उनके साथ महेश मांजरेकर, पीयूष मिश्रा, ओमकार कपूर और स्नेहिल दीक्षित मेहरा की सशक्त मौजूदगी इस पारिवारिक मनोरंजन को और भी यादगार बना देती है।
