मुंबई, 24 जुलाई (वार्ता) गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सोनी सब के कलाकारों ने उन लोगों को याद किया, जिन्होंने उनके जीवन और करियर को दिशा दी तथा उनसे मिली सीखों को साझा किया। कलाकारों ने बताया कि उनके गुरुओं ने न केवल पेशेवर बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। ‘यादें’ में डॉ. प्रीति देशमुख की भूमिका निभा रहीं छवि पांडे ने कहा कि उनके लिए उनकी मां सबसे बड़ी गुरु हैं। उन्होंने कहा कि मां से मिले जीवन के सबक हमेशा उनके साथ रहते हैं, जबकि निर्देशन टीम से मिली छोटी-छोटी सीखों ने उनके अभिनय को निखारा है।
‘यादें’ में डॉ. रौनक भाटिया का किरदार निभा रहे देविश आहूजा ने अपने माता-पिता को पहला गुरु बताते हुए कहा कि हर प्रोजेक्ट उन्हें नया गुरु देता है। उन्होंने कहा कि अपने वरिष्ठों से उन्होंने सकारात्मक सोच, उदारता और दूसरों को प्रेरित करने का महत्व सीखा है। ‘हस्तिनापुर के वीर’ में कुंती की भूमिका निभा रहीं तोरल रसपुत्रा ने कहा कि उन्हें हर प्रोजेक्ट और हर सहकर्मी से कुछ नया सीखने का अवसर मिला है। उनके अनुसार, सीखना कभी नहीं छोड़ना और सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना सबसे महत्वपूर्ण सीख है।
‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में शनाया का किरदार निभा रहीं मुस्कान बामने ने कहा कि उनके माता-पिता उनके सबसे बड़े गुरु हैं। उन्होंने बताया कि अपने शुरुआती दिनों में वरिष्ठ कलाकारों और निर्देशकों के सहयोग ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया, जिसे वह अब नए कलाकारों के साथ साझा करने की कोशिश करती हैं।
‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में अश्विन की भूमिका निभा रहे समरिद्ध बावा ने कहा कि वह हमेशा वरिष्ठों के अनुभव से सीखने का प्रयास करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके खेल प्रशिक्षक ने उन्हें सिखाया था कि मार्गदर्शन लेना कमजोरी नहीं बल्कि ताकत है और यही सीख आज भी उनके साथ है। कलाकारों ने कहा कि गुरु केवल शिक्षक नहीं होते, बल्कि वे सभी लोग होते हैं जो अपने अनुभव, मार्गदर्शन और प्रेरणा से जीवन को नई दिशा देते हैं।

