न्यूयॉर्क, 07 मार्च (वार्ता) एक पाकिस्तानी नागरिक को अमेरिकी अधिकारियों की हत्या की साजिश रचने के मामले में दोषी ठहराया गया है जिसके संबंध ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से भी रहे हैं।
करीब 47 वर्षीय आसिफ मर्चेंट नामक उस व्यक्ति पर 2024 में अमेरिका में शीर्ष राजनीतिक नेताओं की हत्या के लिए सुपारी किलर नियुक्त करने की साजिश रचने आरोप था जिनमें तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल थे।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से कथित तौर पर जुड़े मर्चेंट को न्यूयॉर्क के ब्रुकलीन में संघीय जूरी ने एक सप्ताह चले मुकदमे के बाद मर्डर-फॉर-हायर और अंतरराष्ट्रीय सीमा पार आतंकवादी साजिश के आरोपों में दोषी पाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मर्चेंट को 2023 में आईआरजीसी ने अमेरिका भेजा था, ताकि संभावित सहयोगियों की तलाश की जा सके। बाद में 2024 में वह दोबारा अमेरिका आया और उसे तीन अमेरिकी राजनीतिक हस्तियों में से किसी एक की हत्या करवाने, संवेदनशील दस्तावेज चुराने और विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का मिशन सौंपा गया था।
जांच में खुलासा हुआ कि मर्चेंट ने न्यूयॉर्क में एक परिचित से संपर्क कर उसे सुपारी किलरों से मिलाने को कहा। लेकिन उस व्यक्ति ने इसकी जानकारी पुलिस को दे दी और वह जांच एजेंसियों का गोपनीय स्रोत बन गया। इसके बाद अंडरकवर पुलिसकर्मी सुपारी किलर बनकर जून 2024 में मर्चेंट से मिले और अगले महीने उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
काश पटेल, जो उस समय फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) के निदेशक थे, ने फैसले पर कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब ईरान से जुड़े तत्वों ने अमेरिकी धरती पर नागरिकों को निशाना बनाने की कोशिश की हो। उन्होंने कहा कि एफबीआई ऐसे खतरों को रोकने और लोकतांत्रिक व्यवस्था में हस्तक्षेप करने वालों को जवाबदेह ठहराने के लिए प्रतिबद्ध है।
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, दोषी करार दिए जाने के बाद मर्चेंट को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
मुकदमे में यह भी सामने आया कि मर्चेंट ने हत्या की संभावित योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की और अलग-अलग परिस्थितियों में लक्ष्य को मारने के तरीके पूछे। उसने यह भी कहा था कि हत्या उसके अमेरिका छोड़ने के बाद की जाएगी और वह विदेश से कोड वर्ड के जरिए संपर्क में रहेगा।
