इस्लामाबाद, 16 फरवरी (वार्ता) पाकिस्तान की राष्ट्रीय विमानन कंपनी पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) के पूर्ण निजीकरण का रास्ता साफ हो गया है। आरिफ हबीब ग्रुप के नेतृत्व वाला कंपनी समूह एयरलाइन की शेष 25 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है। यह जानकारी द न्यूज इंटरनेशनल ने दी है।
इस कदम के बाद कंसोर्टियम को पीआईए का पूर्ण स्वामित्व मिल जाएगा, जो पाकिस्तान के हालिया इतिहास में किसी सरकारी उपक्रम से जुड़े सबसे बड़े निजीकरण सौदों में से एक माना जा रहा है। आरिफ हबीब लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शाहिद अली हबीब ने पुष्टि की है कि कंपनी समूह ने शेष शेयर खरीदने का निर्णय लिया है।उन्होंने बताया कि इस संबंध में औपचारिक फैसला अप्रैल में लिए जाने की उम्मीद है, जबकि भुगतान प्रक्रिया सहमत ढांचे के अनुसार 12 महीनों के भीतर पूरी की जाएगी। इसके साथ ही पीआईए का पूर्ण रूप से निजी स्वामित्व में स्थानांतरण हो जाएगा। इससे पहले कंपनी समूह ने दिसंबर में पीआईए की 75 प्रतिशत हिस्सेदारी 135 अरब पाकिस्तानी रुपये (लगभग 48.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर) में खरीदी थी। यह सौदा घाटे में चल रही और सीमित परिचालन वाली एयरलाइन के निजीकरण की सरकारी कोशिशों में एक बड़ा मील का पत्थर माना गया था। शेष 25 प्रतिशत हिस्सेदारी का मूल्य लगभग 45 अरब पाकिस्तानी रुपये (करीब 16 करोड़ अमेरिकी डॉलर) आंका गया है। इस प्रकार, पूरा सौदा संपन्न होने पर कुल लेनदेन का आकार करीब 180 अरब पाकिस्तानी रुपये (लगभग 64.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर) हो जाएगा। इस वर्ष की शुरुआत में तय शर्तों के तहत सरकार ने कंसोर्टियम को शेष शेयर खरीदने के विकल्प के प्रयोग के लिए 90 दिन की अवधि दी थी, जिसकी समयअसीमा अप्रैल के अंत तक है। समझौते के अनुसार, भुगतान के लिए 12 महीने का समय दिया जाएगा, ताकि खरीदारों पर वित्तीय दबाव कम रहे और संक्रमण की स्पष्ट समय सीमा सुनिश्चित हो सके।
पीआईए के पूर्ण अधिग्रहण के बाद एयरलाइन पूरी तरह निजी इकाई के रूप में कार्य करेगी और लेनदेन पूरा होने के बाद उसके निदेशक मंडल में सरकार द्वारा नामित कोई सदस्य नहीं रहेगा। शाहिद अली हबीब के अनुसार, इससे शासन और प्रबंधन ढांचे में बुनियादी बदलाव आएगा और नए मालिकों को सुधार लागू करने में अधिक परिचालन स्वतंत्रता मिलेगी। उल्लेखनीय है कि वर्षों से बढ़ते वित्तीय घाटे, परिचालन अक्षमताओं और भारी कर्ज के कारण पाकिस्तान सरकार ने राष्ट्रीय एयरलाइन के निजीकरण का फैसला किया। पीआईए लंबे समय से अधिक कर्मचारियों, पुराने विमानों के बेड़े, सीमित लाभकारी मार्गों और प्रशासनिक चुनौतियों से जूझ रही है। इसे बचाए रखने के लिए बार-बार सार्वजनिक धन का इस्तेमाल करना पड़ा, जिससे पाकिस्तान की पहले से दबाव में चल रही वित्तीय स्थिति पर बोझ बढ़ा। अधिकारियों का कहना है कि निजी क्षेत्र को नियंत्रण सौंपने से व्यापक पुनर्गठन संभव होगा। श्री हबीब के अनुसार, सुधार योजना में कर्मचारियों के प्रदर्शन मानकों में सुधार, टिकटिंग और आरक्षण प्रणालियों का आधुनिकीकरण, सुरक्षा अनुपालन को मजबूत करना और व्यावसायिक रूप से लाभकारी मार्गों पर उड़ानों की संख्या बढ़ाना शामिल है। निजीकरण के तहत बेड़े के विस्तार, नवीनीकरण और आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया जाएगा। आधुनिक विमान ईंधन और रखरखाव लागत कम करने के साथ-साथ यात्रियों की सुविधा और विश्वसनीयता बढ़ा सकते हैं। ये दो ऐसे कारक हैं, जिन्होंने अतीत में पीआईए की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को प्रभावित किया है।

