रियाद, 16 फरवरी (वार्ता) सऊदी अरब ने कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक को फिर से अपनी भूमि के तौर पर वर्गीकृत करने को लेकर इज़रायल की निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन और इलाके में शांति की कोशिशों के लिए ख़तरा बताया है। सऊद अरब के विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि यह कदम कब्ज़े वाले इलाके में एक नयी कानूनी और प्रशासनिक हकीकत को थोपता है, जिससे द्वि-राष्ट्र समाधान और फ़िलिस्तीनी अधिकार कमज़ोर होते हैं। मंत्रालय ने कहा कि फ़िलिस्तीनी ज़मीन पर इज़रायल का कोई हक़ नहीं है। मंत्रालय ने इन कदमों को फ़िलिस्तीनी लोगों के चार जून, 1967 की सीमाओं पर एक आज़ाद देश बनाने के कानूनी हक़ पर हमला बताया, जिसकी राजधानी पूर्वी येरुशलम हो।
उल्लेखनीय है कि इज़रायली सरकार ने कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक के बड़े इलाकों को अपनी भूमि के तौर पर वर्गीकृत करने की योजना को मंज़ूरी दी, अगर फ़िलिस्तीनी मालिकाना हक़ साबित नहीं कर पाते। यह प्रस्ताव दक्षिणपंथी मंत्रियों बेज़ालेल स्मोट्रिच (वित्त ), यारिव लेविन (न्याय ), और इज़रायल काट्ज़ (रक्षा ) ने रखा था।
श्री स्मोट्रिच ने इस योजना को ‘हमारी सभी ज़मीनों पर नियंत्रण करने के लिए समाधान क्रांति’ का अगला कदम बताया, जबकि श्री लेविन ने इसे इज़रायल के अपने सभी हिस्सों पर अपनी पकड़ मज़बूत करने की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन बताया। इस मंज़ूरी से ज़मीन के मालिकाना हक के समाधान की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गयी हैं, जो 1967 में वेस्ट बैंक पर इज़राइल के कब्ज़े के बाद से रुके हुए थे।

