भारत और बेल्जियम के बीच संबंध अब पारंपरिक कूटनीतिक और व्यापारिक दायरे से निकलकर रणनीतिक साझेदारी की दिशा में बढ़ रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता से यह स्पष्ट है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देश एक-दूसरे को केवल व्यापारिक साझेदार के रूप में नहीं, बल्कि भरोसेमंद रणनीतिक सहयोगी के तौर पर देख रहे हैं. रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, दुर्लभ खनिज और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे विषयों पर सहयोग इस रिश्ते की नई व्यापकता को रेखांकित करता है.भारत के लिए यूरोप में बेल्जियम का महत्व उसकी भौगोलिक स्थिति और औद्योगिक-तकनीकी क्षमता के कारण भी विशेष है. बेल्जियम यूरोपीय संघ की संस्थागत संरचना का महत्वपूर्ण केंद्र है और अत्याधुनिक तकनीक, अनुसंधान तथा लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में उसकी मजबूत स्थिति है. ऐसे में अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य केवल व्यापारिक आंकड़ा नहीं, बल्कि आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की महत्वाकांक्षा है. रक्षा सहयोग का विस्तार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है. भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस प्रक्रिया में अत्याधुनिक तकनीक तथा अंतरराष्ट्रीय साझेदारी दोनों की आवश्यकता है. जोरावर टैंक जैसे आधुनिक रक्षा उपकरणों पर सहयोग यह बताता है कि भारत अब केवल रक्षा सामग्री का खरीदार नहीं, बल्कि सह-विकास और सह-निर्माण की क्षमता रखने वाला साझेदार बन रहा है. सैन्य प्रशिक्षण और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान का निर्णय आतंकवाद तथा बदलती सुरक्षा चुनौतियों के संदर्भ में भी अहम है. स्वच्छ ऊर्जा और दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र में सहयोग भविष्य की अर्थव्यवस्था की जरूरतों से जुड़ा है. काकीनाडा में बड़े ग्रीन अमोनिया प्रोजेक्ट का विकास भारत की हरित ऊर्जा महत्वाकांक्षा और बेल्जियम की तकनीकी क्षमता को जोड़ता है. दुर्लभ खनिजों के प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में सहयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, रक्षा उपकरण और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए इन खनिजों की उपलब्धता आने वाले वर्षों में रणनीतिक शक्ति का आधार बनने वाली है. सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बेल्जियम के आईएमईसी संस्थान की विशेषज्ञता और भारत के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का मेल दूरगामी परिणाम दे सकता है.भारत का बड़ा बाजार, कुशल मानव संसाधन और उत्पादन क्षमता तथा बेल्जियम की अनुसंधान विशेषज्ञता एक-दूसरे की पूरक बन सकती है.
इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण पक्ष साझा वैश्विक दृष्टिकोण भी है. नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, संवाद और कूटनीति में विश्वास तथा यूक्रेन और पश्चिम एशिया में संघर्षों की शीघ्र समाप्ति का समर्थन दोनों देशों की समान सोच को दर्शाता है. आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता भी महत्वपूर्ण है. बहरहाल,आज जब वैश्विक अर्थव्यवस्था युद्ध, ऊर्जा संकट और आपूर्ति शृंखला की अनिश्चितताओं से जूझ रही है, भारत का 7.5 प्रतिशत की गति से बढऩा उसकी आर्थिक मजबूती का संकेत है. यही मजबूती भारत को दुनिया के साथ समानता और आत्मविश्वास के साथ साझेदारी करने की क्षमता देती है. बेल्जियम के साथ संबंधों का यह नया अध्याय इसी बदलते भारत की कूटनीतिक और आर्थिक ताकत का प्रमाण है.
