नयी दिल्ली, 24 जुलाई (वार्ता) बर्मिंघम 2022 में सिल्वर मेडल जीतने वाली तुलिका मान को नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने अपनी लोकेशन की जानकारी न देने के कारण अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है। इसके चलते वे ग्लासगो गेम्स से बाहर हो गई हैं, जिससे भारत के कॉमनवेल्थ गेम्स अभियान को बड़ा झटका लगा है।
तुलिका, जिन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के 78 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता था, ग्लासगो में भारत की ओर से मेडल जीतने की सबसे मजबूत उम्मीदों में से एक थीं। हालांकि, अब वे टीम के साथ यात्रा करने से पहले ही इस इवेंट से बाहर हो गई हैं।
यह घटनाक्रम एक अन्य भारतीय जूडो खिलाड़ी अरुण कुमार (-73 किग्रा) के गेम्स से बाहर होने के एक दिन बाद हुआ है, जो प्रतियोगिता के बाहर डोप टेस्ट में फेल हो गए थे।
सूत्रों के अनुसार, तुलिका ने 12 महीने की अवधि में तीन बार अपनी लोकेशन की जानकारी देने में चूक (वेयरअबाउट्स फेलियर)की है, जिसके कारण वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) कोड के तहत उन्हें अस्थायी रूप से सस्पेंड किया गया है।
‘वेयरअबाउट्स फेलियर’ का संबंध एथलीट की उस जिम्मेदारी से है जिसके तहत उन्हें प्रतियोगिता के बाहर टेस्टिंग के लिए उपलब्ध रहना होता है। ऐसा तब हो सकता है जब कोई एथलीट टेस्टिंग के लिए अपनी लोकेशन की जानकारी जमा करने या अपडेट करने में विफल रहता है, या यदि डोपिंग कंट्रोल अधिकारी घोषित 60 मिनट की टेस्टिंग विंडो के दौरान एथलीट को नहीं ढूंढ पाते हैं। 12 महीनों के भीतर जानकारी देने में तीन बार चूक या टेस्ट छूटने की किसी भी स्थिति को एंटी-डोपिंग नियमों का उल्लंघन माना जाता है और इसके परिणामस्वरूप दो साल का सस्पेंशन हो सकता है, जब तक कि एथलीट मामले को सफलतापूर्वक चुनौती न दे।
तुलिका के बाहर होने से भारत के कॉमनवेल्थ गेम्स दल में एथलीटों की संख्या घटकर 122 रह गई है। भारतीय जूडो टीम अभी ग्लासगो के लिए रवाना नहीं हुई है और 27 जुलाई को रवाना होने वाली है, जबकि जूडो प्रतियोगिता 31 जुलाई से शुरू होगी।
27 वर्षीय तुलिका कई वर्षों से भारत की प्रमुख जूडो खिलाड़ियों में से एक रही हैं। कम उम्र में पिता को खोने के बाद अपनी मां, दिल्ली पुलिस की सब-इंस्पेक्टर अमृता द्वारा पाली-बढ़ी तुलिका ने आठ साल की उम्र में फुटबॉल छोड़कर जूडो अपनाया और कोच यशपाल सोलंकी के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग की।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि बर्मिंघम में 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में मिली, जहां वे सिल्वर मेडल जीतने वाली दूसरी भारतीय जूडो खिलाड़ी बनीं। बाद में, घुटने की गंभीर चोट से उबरकर उन्होंने पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया, जहाँ उन्होंने देश की एकमात्र जूडोका के तौर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।
इस मामले का अंतिम नतीजा नाडा की कार्यवाही पर निर्भर करेगा। अगर ‘वेयरअबाउट्स’ (ठिकाने की जानकारी न देने) के आरोपों को सही माना जाता है, तो तुलिका पर दो साल तक का बैन लग सकता है। इससे उनके करियर और भविष्य के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत की मेडल जीतने की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है।
