भोपाल: राजधानी की कोलार तहसील अंतर्गत ग्राम कजलीखेड़ा में गुरुवार को प्रशासनिक अमला सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत प्रभावित मकानों को हटाने पहुंचा. प्रस्तावित सड़क निर्माण एवं विस्तार कार्य के लिए पहले ही प्रभावित परिवारों को नोटिस जारी किए जा चुके थे. हालांकि ग्रामीणों का कहना था कि उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है, इसलिए उन्होंने अपने घर खाली नहीं किए.
कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ नगर निगम का अतिक्रमण निरोधक दल और बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद रहा. जैसे ही बुलडोजर से मकानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास किया गया, ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. महिलाएं और बच्चे भी कार्रवाई के विरोध में सामने आ गए और प्रशासन से पहले पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग करने लगे.
ग्रामीणों का कहना था कि वे सड़क निर्माण का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन उन्हें किसी व्यवस्थित स्थान पर बसाए बिना मकान हटाना उचित नहीं है. बढ़ते विरोध के बीच अधिकारियों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बन सकी. इसके बाद प्रशासन ने करीब आधा दर्जन खाली पड़े मकानों पर कार्रवाई की और फिर टीम वापस लौट गई. मौके पर कोलार तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे.
मंगलवार को कलेक्टर से की थी शिकायत
लोक निर्माण विभाग द्वारा कजलीखेड़ा में सड़क निर्माण एवं चौड़ीकरण का कार्य कराया जा रहा है, जिसकी जद में लगभग 60 झुग्गियां और मकान आ रहे हैं. इससे पहले मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान गांव के 15 महिला एवं पुरुष प्रतिनिधियों ने कलेक्टर प्रियंक मिश्रा से मुलाकात कर पुनर्वास को लेकर अपनी चिंता जताई थी. ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित एक पहाड़ी क्षेत्र में बसाने की तैयारी की जा रही है, जहां पेयजल जैसी आवश्यक व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं है.
वहीं, इस संबंध में एसडीएम पीसी पांडेय का कहना है कि सड़क निर्माण कार्य सार्वजनिक हित में किया जा रहा है. प्रभावित लोगों को स्वयं मकान हटाने के लिए पूर्व में सूचित किया जा चुका है तथा पूरी कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है.
