तेहरान/दोहा, 26 मई (वार्ता) ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मंगलवार को सैन्य कमांडरों से कहा कि खाड़ी क्षेत्र के देशों ने यह निष्कर्ष निकाल लिया है कि खाड़ी में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति “स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है।” साथ ही उन्होंने ईरान की रक्षा संरचना में व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरानी वार्ताकार कतर में वाशिंगटन के साथ युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से बातचीत कर रहे हैं।
ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार श्री पेजेशकियन ने कहा, “सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर रहना अवास्तविक और अप्रभावी सोच साबित हुई है।” उन्होंने कहा कि “दुश्मन ने नई तकनीकों और साधनों को हासिल कर लिया है” तथा सशस्त्र बलों को विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक संस्थानों और ज्ञान-आधारित कंपनियों के साथ गहरे सहयोग के माध्यम से “तकनीकी बढ़त और रक्षा क्षमताओं को मजबूत” करने का निर्देश दिया। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए दिये गये ये बयान ऐसे समय सामने आये जब ईरानी वार्ताकार दोहा में कतरी मध्यस्थों के साथ बातचीत में शामिल थे। ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी ने एक सूत्र के हवाले से कहा कि वार्ता “कुल मिलाकर सकारात्मक” रही और इससे “समग्र बातचीत में प्रगति” हुई है।
उसी सूत्र ने सावधानी बरतने की बात भी कही। सूत्र ने कहा, “यह नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका एक अविश्वसनीय पक्ष के रूप में जाना जाता है और इसी कारण ईरान अत्यधिक सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहा है।” वित्तीय वार्ता के केंद्र में ईरान की जमी हुई लगभग 24 अरब डॉलर की संपत्तियों को जारी करने का प्रस्ताव है। आईआरजीसी से संबद्ध तस्नीम न्यूज ने वार्ता टीम के करीबी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि समझौता ज्ञापन (एमओयू) की घोषणा होते ही लगभग 12 अरब डॉलर तत्काल उपलब्ध कराये जाएं, जबकि शेष राशि अगले 60 दिनों की वार्ता अवधि के दौरान हस्तांतरित की जाये। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ की हालिया कतर यात्रा के दौरान शुरुआती किस्त तक पहुंच और हस्तांतरण संबंधी प्रतिबंधों में ढील प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। विचाराधीन मसौदा समझौते में 60 दिन के युद्धविराम विस्तार, होर्मुज जलडमरूमध्य को पुनः खोलने की संभावना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की वार्ता के लिए एक रूपरेखा शामिल बतायी जा रही है। हालांकि प्रतिबंधों में राहत, जमी हुई संपत्तियों की रिहाई और ईरान की परमाणु गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंधों की अमेरिकी मांग जैसे मुद्दों पर अभी भी बड़े मतभेद बने हुए हैं।
मुख्य विवादित मुद्दों में ईरान का संवर्धित यूरेनियम भंडार भी शामिल है। संघर्ष की शुरुआत में माना जा रहा था कि ईरान के पास 60 प्रतिशत तक संवर्धित लगभग 440 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद था, जो हथियार-स्तरीय 90 प्रतिशत शुद्धता की सीमा से तकनीकी रूप से बहुत कम दूरी पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा है कि इस सामग्री को या तो “तत्काल” अमेरिका को सौंपा जाये या ईरान के समन्वय से नष्ट किया जाये। ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने वार्ता में “नो डस्ट, नो डॉलर्स” जैसे कठोर वाक्यांश का इस्तेमाल किया है, जिसका संकेत है कि जब तक ईरान अपने यूरेनियम भंडार को समाप्त नहीं करता, तब तक उसे किसी भी समझौते से आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा। ईरानी अधिकारियों ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि यूरेनियम संबंधी वार्ता तभी शुरू हो सकती है जब पहले संघर्ष समाप्त करने वाले औपचारिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर हो जाएं। कूटनीतिक स्तर पर श्री ट्रंप ने संभावित अमेरिका-ईरान समझौते के बाद खाड़ी देशों से अब्राहम समझौतों में शामिल होने का आग्रह किया है। सूत्रों के अनुसार उन्होंने हाल ही में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और बहरीन के नेताओं से इस संबंध में बातचीत की है। इसे पश्चिम एशिया की राजनीतिक संरचना को बदलने वाले व्यापक क्षेत्रीय पुनर्संतुलन के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। श्री पेजेशकियन ने मंगलवार के संबोधन में संघर्ष के दौरान राजनीतिक संयम बरतने के लिए ईरानी सेना की भी सराहना की। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय हितों पर आधारित यह पेशेवर और जिम्मेदार रवैया देश और व्यवस्था के लिए एक मूल्यवान संपत्ति है।” उन्होंने कमांडरों को “पेशेवर कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्धता और राजनीतिक तथा दलगत मुद्दों से दूरी बनाए रखने” के लिए धन्यवाद दिया।

