वेटिकन सिटी, 26 मई (वार्ता) ईसाई धर्मगुरु पोप लियो चौदहवें ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर अपना पहला बड़ा नीतिगत दस्तावेज जारी करते हुए विशेषज्ञों और दुनिया भर की सरकारों को इसके खतरों के प्रति गंभीर चेतावनी दी है। ‘मैग्निफिका ह्यूमैनिटास: ऑन सेफ़गार्डिंग द ह्यूमन पर्सन इन द टाइम ऑफ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस’ (भव्य मानवता: एआई के दौर में मानव की सुरक्षा) शीर्षक वाले इस दस्तावेज में पोप ने सरकारों से एआई तकनीक के विकास की रफ्तार को धीमा करने का आग्रह किया है। उन्होंने सचेत किया कि एआई प्रणालियाँ गलत जानकारी फैला रही हैं, टकराव को बढ़ावा दे रही हैं और दुनिया को कभी न खत्म होने वाले युद्ध की राह पर ले जाने का जोखिम पैदा कर रही हैं। दस्तावेज में बाइबल की ‘टावर ऑफ बेबेल’ की कहानी का जिक्र करते हुए पोप ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब इंसानों ने घमंड में आकर बिना ईश्वर के आशीर्वाद के स्वर्ग तक पहुँचने वाली मीनार बनाने की कोशिश की, तो उसका परिणाम विनाशकारी रहा। उन्होंने कहा, “मैं सभी से अपील करता हूँ कि वे एक और टावर ऑफ बेबेल बनाना बंद करें और मानवता की भलाई के लिए अपनी ताकत जुटाएं।” धर्मगुरु ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि एआई से जुड़ा डेटा और ताकत निजी क्षेत्र के कुछ गिने-चुने लोगों के हाथों में सिमटती जा रही है। उन्होंने कहा, “सिर्फ अमूर्त नैतिकताओं की बातें करना काफी नहीं है, इसके लिए मजबूत कानूनी ढांचे, स्वतंत्र निगरानी और एक सजग राजनीतिक व्यवस्था की जरूरत है जो अपनी जिम्मेदारी से पीछे न हटे।”
पोप ने दुनिया में बढ़ते युद्धों और हथियारों की होड़ पर दुख जताते हुए कहा कि एआई को युद्ध में शामिल करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इंसानों की जान लेने से जुड़े घातक फैसले एआई प्रणालियों के भरोसे छोड़ना पूरी तरह से वर्जित होना चाहिए। इसी संदर्भ में धर्मगुरु ने सदियों पुराने ‘न्यायसंगत युद्ध’ (जस्ट वॉर) के सिद्धांत को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “यह सिद्धांत अब पुराना और अप्रासंगिक हो चुका है। बल, हिंसा और हथियारों का उपयोग हमेशा आम जनता के लिए विनाशकारी परिणाम लाता है।” पोप ने एआई प्रणालियों के निर्माण और इसके लिए जरूरी कंप्यूटर व स्मार्टफोन बनाने वाले कारखानों के मजदूरों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे ‘गुलामी के नए रूप’ की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि दुनिया के कुछ हिस्सों में बच्चे और किशोर बेहद खतरनाक परिस्थितियों में दुर्लभ मृदा तत्वों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) को निकालने के काम में लगे हैं, जो आज के समय की नैतिक चेतना को झकझोरता है।
इस महत्वपूर्ण दस्तावेज में पोप ने एक बड़ा कदम उठाते हुए इतिहास में कैथोलिक चर्च की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि चर्च ने 19वीं शताब्दी तक अटलांटिक के दोनों ओर होने वाले दास व्यापार की कड़े शब्दों में निंदा नहीं की थी, जो ईसाई स्मृति पर एक गहरे घाव की तरह है। उन्होंने लिखा, “इसके लिए, मैं चर्च की ओर से ईमानदारी से क्षमा मांगता हूँ।”

