दमोह:न्यायालय ने वर्ष 2019 के एक चेक बाउंस प्रकरण में आरोपी को दोषी करार देते हुए जेल भेजने के आदेश जारी किए हैं.यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दीर्घा ऐरन की अदालत द्वारा सुनाया गया.प्रकरण में परिवादी दिनेश चौबे ने बताया कि आरोपी शिक्षक मूलचंद द्वारा निजी पारिवारिक जरूरत को बताते हुए मुझसे 6,10,000 की रकम उधार ली गई थी.जिसे आवेस्क ने अपने एसबीआई के खाते से मूलचंद के खाते में आरटीजीएस के द्वारा ट्रांसफर किया था.
यह राशि दिनेश चौबे ने उस समय दी जब वह दमोह जबलपुर टोल रोड प्रोजेक्ट पर इंचार्ज के रूप में कार्यरत था. मूलचंद द्वारा रकम के बदले दिया गया चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर 14 जून 2019 को अनादृत हो गया था.इसके बाद परिवादी ने अधिवक्ता के माध्यम से 20 जून 2019 को विधिक नोटिस भेजा, जिसकी रजिस्टर्ड डाक रसीद व अभिस्वीकृति भी न्यायालय में प्रस्तुत की गई.अदालत ने अपने निर्णय में माना कि आरोपी को 24 जून 2019 को नोटिस प्राप्त हो गया था, लेकिन नियमानुसार निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया.
न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी की ओर से ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे भुगतान किए जाने की पुष्टि हो सके.न्यायालय ने उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत आरोप को “युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित” माना.प्रकरण के तथ्य एवं परिस्थिति तथा परिवादी को कारित क्षति व प्रश्नगत चैक की राशि को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्त शिक्षक को परकाम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दण्डनीय अपराध के आरोप में 03 माह के साधारण कारावास के दण्ड से दण्डित किया गया व अभियुक्त को आदेशित किया गया है कि द.प्र.सं. की धारा 357 (3) के अंतर्गत, प्रश्नगत चैक राशि 6,10,000 रूपये व उस पर चेक दिनांक से निर्णय दिनांक तक 9 प्रतिशत वार्षिक दर से साधारण ब्याज लगभग 3,80,335 रूपये, न्यायालय शुल्क 24,300 रूपये एवं विधिक व्यय 1000 रूपये को जोड़ते हुए कुल राशि पूर्णांक में 10,15,635 रूपये (दस लाख पंद्रह हजार छह सौ पैंतीस रूपये मात्र) प्रतिकर के रूप में परिवादी को अदा करने क़ा आदेश जारी किया.
