नयी दिल्ली 25 मई (वार्ता) कांग्रेस ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामलों को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा औ कहा कि उत्तर प्रदेश में लगातार हुए पेपर लीक और नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद मोदी सरकार ने फरवरी 2024 में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम पारित किया था। कांग्रेस संचार विभाग प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को कहा कि सरकार ने इस कानून को “ऐतिहासिक” बताया था, लेकिन विपक्ष ने उसी समय चेताया था कि यह कानून “गेस पेपर” और अन्य तरीकों से होने वाले पेपर लीक को रोकने में नाकाम रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब यह स्पष्ट हो चुका है कि मोदी सरकार का यह कानून पेपर लीक रोकने के लिए पर्याप्त नहीं था। उन्होंने कहा कि भले ही केंद्र सरकार शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सामने नीट 2026 में पेपर लीक से इनकार कर रही हो, लेकिन कथित तौर पर ‘गेस पेपर’ ऊंची बोली लगाने वालों तक पहुंचाया गया। पिछले दो वर्षों में लाखों छात्रों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी है।
श्री जयराम रमेश ने इस मामले में तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए, एनटीए में व्यापक सुधार किए जाने चाहिए और सार्वजनिक परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया, प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर मूल्यांकन तक के लिए एक फुलप्रूफ प्रोटोकॉल तैयार किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री छात्रों के हित और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बचाने के लिए ठोस कदम उठाएंगे या फिर मौजूदा स्थिति को जारी रखेंगे।

