रायपुर। रायपुर में क्षेत्रीय कार्यशाला में केंद्र सरकार ने सहकारी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए डेयरी, मत्स्य और बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों के विस्तार पर बड़ा जोर दिया। “2 लाख नए एम-पैक्स, डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों के गठन एवं सुदृढ़ीकरण” तथा विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारियों सहित नाबार्ड, एफसीआई, नेफेड, एनसीसीएफ और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” विज़न के तहत सहकारी आंदोलन को आधुनिक तकनीक, मजबूत भंडारण व्यवस्था और किसान-केंद्रित योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र ने गुजरात जैसे राज्यों में महिला सशक्तिकरण और आर्थिक समृद्धि का नया मॉडल प्रस्तुत किया है और पूर्वी एवं मध्य भारत के राज्यों में भी इसकी अपार संभावनाएं हैं।
डॉ. भूटानी ने बताया कि केंद्र सरकार अगले पांच वर्षों में 75 हजार नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन और 46 हजार मौजूदा समितियों को मजबूत करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। उन्होंने राज्यों से नवाचारपूर्ण सुझाव और व्यावहारिक समाधान साझा करने का आग्रह करते हुए भरोसा दिलाया कि केंद्र हर स्तर पर सहयोग देगा।
कार्यशाला में यह भी रेखांकित किया गया कि डेयरी सहकारी आंदोलन ग्रामीण महिलाओं के लिए परिवर्तन का बड़ा माध्यम बन रहा है। समितियों से जुड़कर महिलाएं उद्यमिता, वित्तीय समावेशन और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी हासिल कर रही हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारी वित्तीय ढांचा मजबूत हो रहा है।
बैठक में सहकारी क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी और सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल्स पर विशेष चर्चा हुई। मंत्रालय ने कहा कि डेयरी और कृषि अपशिष्टों से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर, बायो-एनर्जी, व्हे प्रोटीन और कार्बन क्रेडिट जैसे क्षेत्रों में नए आय स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी।
छत्तीसगढ़ सरकार के सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना ने कहा कि राज्य सरकार डेयरी विकास, बायोगैस परियोजनाओं और अन्न भंडारण अवसंरचना को प्राथमिकता दे रही है।
कार्यशाला में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना, मल्टीपर्पज पैक्स, निष्क्रिय सहकारी समितियों के पुनर्जीवन, व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0, सोलर रूफटॉप, गोबरधन योजना और डेयरी वैल्यू एडिशन जैसे विषयों पर विस्तृत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। समापन सत्र में मिशन मोड में योजनाओं के क्रियान्वयन, बेहतर समन्वय और राज्यों के बीच श्रेष्ठ अनुभव साझा करने पर जोर दिया गया।
