इजरायल को डर, ईरान के साथ ‘खराब समझौता’ कर लेंगे ट्रंप : रिपोर्ट

वाशिंगटन/तेल अवीव, 13 मई (वार्ता) इजरायल का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डाेनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ ऐसा समझौता कर सकते हैं जिसमें युद्ध शुरू होने के प्रमुख कारणों से जुड़े मुद्दों का समाधान अधूरा रहने की आशंका है।

सीएनएन की एक रिपोर्ट में कई इजरायली सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यदि कोई समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को आंशिक रूप से बरकरार रखते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को लेकर मुद्दों को नजरअंदाज करता है, तो इजरायल इसे “अधूरा युद्ध” मानेगा।

एक इजरायली सूत्र ने कहा, “सबसे बड़ी चिंता यह है कि श्री ट्रंप बातचीत से थक जाएंगे और अंतिम समय में रियायत देकर कोई भी समझौता कर लेंगे।” सूत्र ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों ने इजरायल को आश्वस्त किया है कि ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार का मुद्दा बातचीत में शामिल रहेगा, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलों और ईरान के प्रॉक्सी नेटवर्क को वार्ता से बाहर रखा जाना “बहुत बड़ा मुद्दा” है।

युद्ध के दौरान ईरान ने इजरायल और खाड़ी अरब देशों पर 1,000 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं तथा ड्रोन हमले भी किये थे। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, ईरान की प्रमुख सैन्य क्षमताओं को प्रभावित किए बिना उस पर आर्थिक दबाव कम कर देने वाला ‘आंशिक समझौता’ ईरानी शासन को स्थिरता और अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध करा सकता है।

इन चिंताओं से श्री ट्रंप और बेंजमिन नेतन्याहू के बीच रणनीतिक मतभेद भी उजागर होते हैं। श्री ट्रंप जहां युद्ध दोबारा शुरू करने से बचना चाहते हैं, वहीं श्री नेतन्याहू को आशंका है कि संघर्ष अपने मूल उद्देश्यों को पूरा किए बिना समाप्त हो सकता है।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने कहा कि ईरान अच्छी तरह जानता है कि उसकी मौजूदा स्थिति बेहतर नहीं है और श्री ट्रंप वार्ता में “सभी पत्ते अपने हाथ में” रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें नष्ट हो चुकी हैं, उसके उत्पादन केंद्र ध्वस्त कर दिए गए हैं, नौसेना डूब चुकी है और उसके प्रॉक्सी समूह कमजोर हो गए हैं। ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी के तहत अमेरिकी सैन्य नाकेबंदी के कारण ईरान को प्रतिदिन लगभग 50 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है।

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए किसी समझौते की संभावना अब भी अनिश्चित बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर दोनों पक्षों के बीच अब भी बड़े मतभेद बने हुए हैं।

इजरायल इस संभावना के लिए भी तैयारी कर रहा है कि संघर्ष फिर से शुरू हो सकता है। इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन कूटनीतिक समाधान पर जोर देता रहा है और ऐसा प्रतीत होता है कि वह ऐसे युद्ध को दोबारा शुरू नहीं करना चाहता, जिसने अमेरिका में गैस की कीमतों को तेजी से बढ़ा दिया है।

 

 

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