बेंगलुरु, 04 जुलाई (वार्ता) भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने कोच क्रेग फुल्टन ने कहा है कि टीम सही समय पर अपनी लय पकड़ती दिख रही है। टीम ने एफआईएच हॉकी प्रो लीग 2025-26 के यूरोप दौरे का इस्तेमाल विश्व कप और एशियाई खेलों से पहले अपनी तैयारी को मजबूत करने के लिए किया। मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने कहा कि यूरोप में किए गए प्रदर्शन से पता चलता है कि टीम दुनिया की बेहतरीन टीमों का मुकाबला करने में सक्षम है।
फुल्टन ने कहा, “इस प्रो लीग के दौरान टीम का आत्मविश्वास बढ़ना सबसे बड़ी बात रही है। जर्मनी और नीदरलैंड्स पर जीत और इंग्लैंड के खिलाफ दमदार प्रदर्शन यह साबित करते हैं कि जब हम अपने गेम प्लान पर टिके रहते हैं, तो हम दुनिया की किसी भी टीम का मुकाबला कर सकते हैं और उन्हें हरा भी सकते हैं।” उन्होंने कहा कि टीम ने दबाव में बेहतर संयम दिखाया और खेलने के अलग-अलग तरीकों के हिसाब से खुद को अच्छी तरह ढाला। ये खूबियां विश्व कप और एशियाई खेलों में बहुत काम आएंगी। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने भी इन विचारों से सहमति जताई और कहा कि दुनिया की बेहतरीन टीमों के खिलाफ जीत से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा है।
उन्होंने कहा, “इस प्रो लीग अभियान से हमें काफी आत्मविश्वास मिला है क्योंकि हमने वर्ल्ड हॉकी की कुछ सबसे मजबूत टीमों के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन किया है। टॉप-रैंक वाली टीमों को हराना हमेशा खास होता है, लेकिन इससे भी अहम बात यह है कि इससे पता चलता है कि एक टीम के तौर पर हम जो कड़ी मेहनत कर रहे हैं, उसका फल मिल रहा है।” हरमनप्रीत ने टीम के संतुलन पर भी जोर दिया और पूरे अभियान के दौरान लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए डिफेंस, मिडफील्ड और फॉरवर्ड खिलाड़ियों की तारीफ की। हालांकि प्रो लीग की फाइनल रैंकिंग में शायद भारत की तरक्की पूरी तरह न दिखे, लेकिन यूरोप में टीम के प्रदर्शन से लगता है कि उसने सही समय पर अपनी लय हासिल कर ली है। इससे इंटरनेशनल कैलेंडर के दो सबसे बड़े टूर्नामेंट से पहले टीम का हौसला बढ़ा है।
उल्लेखनीय है कि मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी और पेरिस ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीदरलैंड्स पर जीत, और साथ ही दुनिया की नंबर 3 टीम इंग्लैंड के खिलाफ दमदार प्रदर्शन ने मुश्किल शुरुआत के बाद टीम की लगातार तरक्की को साबित किया है। प्रो लीग के तीनों चरणों में यह बदलाव साफ तौर पर देखा गया। भारत ने सीजन की शुरुआत राउरकेला में घरेलू चरण के दौरान बेल्जियम और अर्जेंटीना से निराशाजनक हार के साथ की थी, लेकिन होबार्ट में टीम ने वापसी के संकेत दिए। वहां डिफेंस में सुधार ने स्पेन और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम को मुकाबले में बनाए रखा।
असली कामयाबी यूरोप में मिली। रॉटरडैम में भारत ने जर्मनी को 3-1 से हराया और नीदरलैंड्स को 3-2 से मात दी, जिससे यह साबित हुआ कि वे दुनिया की दो सबसे मजबूत टीमों का मुकाबला कर सकते हैं और उन्हें हरा भी सकते हैं। टीम का अटैक काफी संतुलित दिखा; सिर्फ सेट-पीस पर निर्भर रहने के बजाय ओपन प्ले और पेनल्टी कॉर्नर दोनों से गोल किए गए। यह आत्मविश्वास लंदन में भी जारी रहा, जहां भारत पाकिस्तान और इंग्लैंड के खिलाफ तय समय (रेगुलर टाइम) में अजेय रहा। टीम ने पाकिस्तान के खिलाफ दोनों मैच जीते, जिसमें 7-1 की शानदार जीत भी शामिल थी, जबकि इंग्लैंड के खिलाफ दोनों मैच ड्रॉ रहे और एक शूटआउट में जीत मिली। भारत की बढ़ती परिपक्वता पूरी टीम के योगदान में दिखी। दिलप्रीत सिंह और जुगराज सिंह चार-चार गोल के साथ संयुक्त रूप से टॉप स्कोरर रहे, जबकि अभिषेक, सुखजीत सिंह और नीलाकांता शर्मा ने भी अहम योगदान दिया।

