बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार जून माह में लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह हुआ है. दरअसल,यह भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत है. पिछले वर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत की वृद्धि यह बताती है कि देश में आर्थिक गतिविधियां निरंतर गति पकड़ रही हैं. विशेष रूप से ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री में आई तेजी ने कर संग्रह को मजबूत आधार प्रदान किया है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 6.32 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह भी इस बात का प्रमाण है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी अपनी विकास यात्रा बनाए हुए है.
जीएसटी संग्रह केवल सरकारी आय का आंकड़ा नहीं होता, बल्कि यह बाजार की वास्तविक स्थिति का भी दर्पण है. जब लोग अधिक खरीदारी करते हैं, उद्योग अधिक उत्पादन करते हैं और व्यापार में गति आती है, तब कर संग्रह स्वत: बढ़ता है. जून के आंकड़े इसी व्यापक आर्थिक गतिविधि की पुष्टि करते हैं. यात्री वाहनों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि, प्रमुख वाहन कंपनियों का बेहतर प्रदर्शन तथा उपभोक्ता वस्तुओं की बढ़ती मांग इस सकारात्मक माहौल को मजबूत करती है.
पिछले वर्ष जीएसटी दरों में किए गए संशोधन को लेकर कई आशंकाएं व्यक्त की गई थीं. अनेक वस्तुओं पर कर दर 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने के निर्णय को राजस्व के लिए जोखिम माना गया था. लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि कम कर दरों ने मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. अधिक बिक्री के कारण कर आधार विस्तृत हुआ और कुल संग्रह में भी वृद्धि दर्ज हुई. यह अनुभव बताता है कि संतुलित कर व्यवस्था कई बार ऊंची कर दरों की तुलना में अधिक प्रभावी सिद्ध होती है.
हालांकि राज्यों के आंकड़े एक समान तस्वीर प्रस्तुत नहीं करते. उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात और तेलंगाना जैसे राज्यों में कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, झारखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में गिरावट चिंता का विषय है. यह अंतर बताता है कि देश के सभी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों की गति समान नहीं है. जिन राज्यों में संग्रह घटा है, वहां निवेश, औद्योगिक उत्पादन और उपभोग बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता होगी.
एक अन्य उल्लेखनीय तथ्य आयात से प्राप्त जीएसटी राजस्व में 34 प्रतिशत की वृद्धि है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक व्यापार की चुनौतियों के बावजूद भारत का आयात-निर्यात तंत्र अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है. यह देश की आर्थिक लचीलापन और मजबूत घरेलू मांग का संकेत भी देता है. सरकार द्वारा आयकर में राहत, बुनियादी ढांचे पर निवेश तथा उपभोग बढ़ाने वाले अन्य उपाय भी इस सकारात्मक वातावरण को बल दे रहे हैं.
फिर भी केवल बढ़ते कर संग्रह से संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता. सरकार के सामने चुनौती यह है कि इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग उत्पादक निवेश, रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे के विस्तार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी प्राथमिकताओं पर किया जाए. साथ ही जीएसटी व्यवस्था को और सरल बनाना, छोटे व्यापारियों की अनुपालन लागत कम करना तथा राज्यों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है.
जून का जीएसटी संग्रह यह संदेश देता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है. अब आवश्यकता इस बात की है कि इस गति को स्थायी बनाया जाए, ताकि आर्थिक विकास का लाभ देश के प्रत्येक राज्य, प्रत्येक उद्योग और प्रत्येक नागरिक तक समान रूप से पहुंच सके.
